परिसीमन और महिला आरक्षण पर लोकसभा में तीखी बहस, नेताओं ने रखे अलग-अलग मत

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नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बहस के दौरान कई दिग्गज नेताओं ने अपने-अपने विचार रखे।

राहुल गांधी का आरोप

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि

  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम वास्तव में महिला सशक्तिकरण से जुड़ा नहीं है
  • इन विधेयकों के जरिए चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश की जा रही है
  • इससे दलित, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यकों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं

सत्ता पक्ष का जवाब

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे असंसदीय बताया।

केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि

  • महिला आरक्षण कोई एहसान नहीं, बल्कि उनके योगदान की मान्यता है
  • यह कदम देश में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाएगा

भाजपा का पक्ष

भाजपा सांसद संध्या राय ने इसे

  • महिलाओं की गरिमा और अधिकारों से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया

वहीं हेमा मालिनी ने कहा कि

  • यह विधेयक महिलाओं को अपनी आवाज उठाने का मंच देगा

विपक्ष की अन्य प्रतिक्रियाएं

  • डीएमके सांसद कनिमोझी ने विधेयकों को संघीय ढांचे के खिलाफ बताया
  • कांग्रेस नेता शशि थरूर ने व्यापक चर्चा की जरूरत पर जोर दिया
  • टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने इसे जल्दबाजी में लाया गया कदम बताया
  • समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव ने महिला शिक्षा पर अधिक ध्यान देने की बात कही

अन्य दलों की राय

  • वाईएसआरसीपी सांसद पीवी मिधुन रेड्डी ने कहा कि परिसीमन राष्ट्र निर्माण का साधन होना चाहिए
  • एसएडी की हरसिमरत कौर बादल ने बिना परिसीमन के आरक्षण लागू करने की मांग की
  • केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इसे महिलाओं के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया

बहस का महत्व

यह बहस केवल कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि

  • लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी
  • राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन
  • सामाजिक न्याय और अधिकार

जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ी हुई है।

लोकसभा में इन विधेयकों पर चर्चा अभी जारी है और आने वाले समय में इस पर महत्वपूर्ण निर्णय होने की संभावना है।

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