
नई दिल्लीलोकसभा में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा जारी है। इनमें
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
- परिसीमन विधेयक, 2026
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026
शामिल हैं। इनका उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करना है।
क्या है मुख्य उद्देश्य
इन विधेयकों के जरिए लोकसभा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लगभग एक-तिहाई सीटों के आरक्षण को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। यह प्रावधान पहले से मौजूद नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 से जुड़ा हुआ है।
सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा पेश विधेयक में लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है।
- 815 सीटें राज्यों से
- 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों से होंगी
परिसीमन की भूमिका
परिसीमन विधेयक के तहत एक आयोग गठित किया जाएगा, जो
- निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करेगा
- महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों का आरक्षण तय करेगा
प्रधानमंत्री का पक्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चर्चा के दौरान कहा कि
- देश की लगभग आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी है
- महिलाओं का प्रतिनिधित्व कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका अधिकार है
- यह विधेयक लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाएगा
उन्होंने विपक्ष से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर रखकर देखा जाए।
गृह मंत्री का स्पष्टीकरण
गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि परिसीमन के बाद
- किसी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी
- दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि
- स्थानीय निकायों में महिला आरक्षण की शुरुआत पहले ही हो चुकी है
- केंद्र सरकार को बिना देरी के मौजूदा सीटों पर ही आरक्षण लागू करना चाहिए
क्यों है यह चर्चा अहम
यह बहस केवल सीटों के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि
- लोकतंत्र में समान भागीदारी
- नीति निर्माण में महिलाओं की भूमिका
- राजनीतिक प्रतिनिधित्व के संतुलन
से जुड़ा बड़ा कदम माना जा रहा है।














