
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया संघर्ष-विराम का भारत ने स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति का रास्ता खुलेगा।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने 8 अप्रैल को जारी बयान में कहा कि मौजूदा हालात में तनाव कम करना, संवाद और कूटनीति ही सबसे जरूरी रास्ता है, जिससे इस संघर्ष को जल्द समाप्त किया जा सकता है।
शांति और स्थिरता पर भारत का जोर
भारत ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में लंबे समय तक शांति बनाए रखने के लिए बातचीत ही सबसे प्रभावी माध्यम है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस संघर्ष से आम लोगों को भारी नुकसान हुआ है और वैश्विक स्तर पर व्यापार व ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर चिंता
भारत ने विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला रखने पर जोर दिया, क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। यहां से जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ट्रंप के फैसले के बाद आई प्रतिक्रिया
यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को अस्थायी रूप से टालने की घोषणा के बाद आया है। इस फैसले को दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
भारत की यह प्रतिक्रिया उसकी पारंपरिक नीति को दर्शाती है, जिसमें वह हमेशा संवाद, शांति और कूटनीति के जरिए विवाद सुलझाने की वकालत करता रहा है।



















