भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में न्यूक्लियर पावर की अहम भूमिका: स्टीवन चू

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स्टैनफोर्ड। अमेरिका के पूर्व ऊर्जा सचिव और नोबेल पुरस्कार विजेता स्टीवन चू ने कहा है कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए न्यूक्लियर पावर एक मजबूत आधार बन सकती है।

ऊर्जा सुरक्षा पर जोर

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने फ्यूल मार्केट की कमजोरियों को उजागर किया है। ऐसे में देशों को अपनी घरेलू ऊर्जा क्षमता मजबूत करनी होगी।

भारत-अमेरिका सहयोग की सराहना

स्टीवन चू ने भारत के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि

  • दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग मजबूत रहा है
  • भारत सतत विकास और जलवायु लक्ष्यों को लेकर गंभीर रहा है

उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रतिबद्धता भविष्य में भी जारी रहेगी।

न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी का महत्व

उन्होंने विशेष रूप से

  • न्यूक्लियर एनर्जी
  • नई रिएक्टर तकनीक
  • फास्ट ब्रीडर रिएक्टर

को भारत के लिए महत्वपूर्ण बताया।

उनके अनुसार, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ईंधन के बेहतर उपयोग में मदद करते हैं और ऊर्जा उत्पादन को अधिक कुशल बना सकते हैं।

वैश्विक सहयोग की जरूरत

चू ने कहा कि भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों से निपटने के लिए

  • भारत
  • अमेरिका
  • चीन
  • यूरोपीय संघ

जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।

क्यों जरूरी है न्यूक्लियर पावर

  • स्थिर और निरंतर ऊर्जा आपूर्ति
  • आयातित ईंधन पर निर्भरता में कमी
  • स्वच्छ ऊर्जा विकल्प के रूप में उपयोग

यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया ऊर्जा सुरक्षा और टिकाऊ विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

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