
नई दिल्लीआईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स द्वारा 15 वर्षीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को टीम में शामिल कर मैदान पर उतारने के मामले ने विवाद का रूप ले लिया है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने इसे बाल श्रम कानून का उल्लंघन बताते हुए फ्रेंचाइजी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
बाल श्रम का आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता शिवकुमार नायक ने आरोप लगाया है कि 15 वर्षीय नाबालिग खिलाड़ी को इतनी बड़ी व्यावसायिक क्रिकेट लीग में शामिल करना बाल श्रम कानून के दायरे में आ सकता है।
उनका कहना है कि इस उम्र में बच्चों का मुख्य ध्यान पढ़ाई और खेल प्रशिक्षण पर होना चाहिए, न कि पेशेवर व्यावसायिक गतिविधियों पर।
FIR दर्ज कराने की मांग
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। एक्टिविस्ट ने राजस्थान रॉयल्स फ्रेंचाइजी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
क्या कहता है कानून?
भारत में लागू बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अनुसार:
- 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार के रोजगार में लगाना प्रतिबंधित है।
- 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक कार्यों में नियुक्त नहीं किया जा सकता।
- कानून के उल्लंघन पर 6 महीने से 2 साल तक की सजा या 20 हजार से 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
बहस का विषय बना मामला
यह मामला अब खेल, शिक्षा और कानून के बीच संतुलन को लेकर नई बहस खड़ी कर रहा है। हालांकि अभी तक राजस्थान रॉयल्स या बीसीसीआई की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



















