सारंगढ़ की सुनीता पटेल बनीं ‘लखपति ड्रोन दीदी’, तकनीक से लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

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रायपुर सही अवसर, तकनीक और मजबूत इरादों के साथ ग्रामीण महिलाएं भी सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। इसकी प्रेरणादायक मिसाल सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के खोरीगांव की रहने वाली सुनीता पटेल हैं, जिन्होंने ड्रोन तकनीक अपनाकर न केवल खेती में बदलाव लाया बल्कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर ‘लखपति ड्रोन दीदी’ की पहचान भी हासिल की।

एक योजना ने बदल दी जिंदगी
सुनीता की सफलता की शुरुआत 15 अगस्त 2023 को हुई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “नमो ड्रोन दीदी” योजना की घोषणा की। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना है। सुनीता ने इस अवसर को पहचानते हुए आगे बढ़ने का निर्णय लिया।

15 दिन की ट्रेनिंग से मिली नई उड़ान
दिसंबर 2023 में सुनीता ग्वालियर पहुंचीं, जहां उन्होंने 15 दिनों का विशेष प्रशिक्षण लिया। इस दौरान उन्होंने ड्रोन संचालन के साथ खेतों में कीटनाशक और नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद IFFCO की ओर से उन्हें कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया गया, जिसने उनकी आजीविका को नई दिशा दी।

खेती में तकनीक से बढ़ी आय
साल 2024 से शुरू हुआ यह सफर अब सफलता की मिसाल बन चुका है। सुनीता ड्रोन की मदद से खेतों में दवा और उर्वरक का छिड़काव कर हर वर्ष 1 से 2 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। खास बात यह है कि वे आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना हर किसान की मदद करने को प्राथमिकता देती हैं।

कार्यशाला में दिखाया शानदार प्रदर्शन
हाल ही में सारंगढ़ मंडी प्रांगण में आयोजित खेती बचाओ अभियान और प्राकृतिक खेती कार्यशाला में सुनीता ने अपने ड्रोन संचालन कौशल का प्रदर्शन किया। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की मौजूदगी में उन्होंने ड्रोन के जरिए छिड़काव का लाइव डेमो दिया, जिसे देखकर उपस्थित लोग काफी प्रभावित हुए और तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया।

योजना का लाभ कैसे लें?
यह पहल दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत संचालित हो रही है। योजना का लाभ लेने के लिए महिला की आयु 18 वर्ष से अधिक, कम से कम 10वीं पास होना और किसी पंजीकृत स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य होना जरूरी है। चयनित महिलाओं को 15 दिनों की मुफ्त ट्रेनिंग दी जाती है और DGCA प्रमाणित रिमोट पायलट सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जाता है।

ड्रोन खरीदने के लिए सरकार 80 प्रतिशत या अधिकतम 8 लाख रुपये तक सब्सिडी देती है, जबकि शेष राशि पर रियायती ब्याज दर पर ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
आज सुनीता पटेल केवल अपने गांव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग गांवों की तस्वीर बदल सकता है।

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