
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा का अनोखा रिश्ता, मगरमच्छ और ग्रामीणों की दोस्ती अब बनेगी शिक्षा का हिस्सा
बेमेतरा छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव में रहने वाला ‘गंगाराम’ नाम का मगरमच्छ इंसानों और वन्यजीवों के बीच सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व की अनूठी मिसाल बन गया। ग्रामीणों के अनुसार, करीब 130 वर्षों तक गांव के तालाब में रहने वाले गंगाराम ने कभी किसी पर हमला नहीं किया, जबकि बच्चे भी उसी तालाब में बेखौफ तैरते थे। अपने शांत स्वभाव के कारण ग्रामीण उसे परिवार का सदस्य और गांव का रक्षक मानते थे।
मौत पर पूरे गांव ने मनाया शोक
जनवरी 2019 में प्राकृतिक कारणों से गंगाराम की मौत के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। उसकी अंतिम यात्रा में 500 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए। फूलों से सजे ट्रैक्टर पर गंगाराम के शव को ले जाया गया और वन विभाग द्वारा पोस्टमार्टम के बाद पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, शोक स्वरूप कई परिवारों ने उस दिन अपने घरों में चूल्हा तक नहीं जलाया।
शिक्षा का हिस्सा बनेगी गंगाराम की कहानी
वर्षों बाद गंगाराम की यह अनोखी कहानी व्यापक पहचान हासिल कर रही है। इंसानों और वन्यजीवों के बीच विश्वास, सह-अस्तित्व और संवेदनशील रिश्ते की मिसाल पेश करने वाली इस कहानी को अब शैक्षणिक सामग्री में भी शामिल किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी को प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा सके।



















