
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल बोले- समयबद्ध परीक्षा और पारदर्शी व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता
भोपाल मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा है कि पैरामेडिकल विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए पंजीयन और परीक्षा संबंधी प्रक्रियाओं को और सरल, पारदर्शी तथा छात्र हितैषी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समयबद्ध शैक्षणिक प्रक्रिया सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह बात उन्होंने मंत्रालय में आयोजित मध्यप्रदेश सह-चिकित्सीय परिषद की 26वीं वार्षिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
समय पर होंगी परीक्षाएं और घोषित होंगे परिणाम
बैठक में उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आगामी शैक्षणिक सत्र से सभी क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं निर्धारित समय-सीमा में आयोजित की जाएं और उनके परिणाम भी समय पर घोषित किए जाएं, ताकि विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।
ऑनलाइन पंजीयन होगा और आसान
बैठक में पंजीयन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। अन्य राज्यों से पंजीकृत पैरामेडिकल विद्यार्थियों के लिए एनओसी की अनिवार्यता समाप्त करने, आधार आधारित ई-हस्ताक्षर और स्व-घोषणा के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने तथा दस्तावेज सत्यापन को अधिक व्यवस्थित करने पर सहमति बनी।
QR कोड से होगा प्रमाण-पत्रों का सत्यापन
मान्यता प्राप्त संस्थानों से उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए भी ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। साथ ही, डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रमाण-पत्रों में QR कोड आधारित सत्यापन व्यवस्था लागू करने और अपूर्ण आवेदनों के समयबद्ध निराकरण का निर्णय भी लिया गया।
एक लाख से अधिक आवेदनों का हुआ समयबद्ध निराकरण
बैठक में बताया गया कि परिषद वर्ष 2017 से लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत 11 ऑनलाइन सेवाएं संचालित कर रही है। जुलाई 2026 तक पंजीयन, नवीनीकरण, एनओसी, माइग्रेशन और अन्य सेवाओं से जुड़े एक लाख से अधिक आवेदनों का समयबद्ध निराकरण किया जा चुका है। अधिकांश सेवाओं में निराकरण की दर 95 प्रतिशत से अधिक, जबकि कई सेवाओं में 99 प्रतिशत तक रही है।
211 संस्थानों को मिली मान्यता
बैठक में वर्ष 2025-26 के दौरान संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। इस दौरान 211 संस्थानों को मान्यता प्रदान की गई, जबकि निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई।



















