जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट बनाएगा हाई पावर्ड फैक्ट फाइंडिंग कमेटी

0
11

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक हुए छात्रों के मार्च और पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए हाई पावर्ड फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने का फैसला किया है। समिति प्रदर्शन के दौरान के CCTV फुटेज की जांच करेगी और पुलिस पर लगाए गए बल प्रयोग के आरोपों की भी पड़ताल करेगी।

पूर्व जज और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नाम मांगे

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी पक्षों से ऐसे पूर्व न्यायाधीशों, पूर्व डीजीपी या रिटायर्ड सीबीआई निदेशकों के नाम सुझाने को कहा है, जिन्हें जांच समिति में शामिल किया जा सके।

समिति यह भी देखेगी कि NEET पेपर लीक और अन्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया या नहीं।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है और केवल प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

पीठ ने कहा कि समिति से समय-समय पर रिपोर्ट मांगी जा सकती है, ताकि अदालत आवश्यक निर्देश जारी कर सके। खास तौर पर महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न और ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों को भी गंभीरता से लिया जाएगा।

जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के संकेत

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जिम्मेदार व्यक्ति के लिए कोई बहाना या औचित्य स्वीकार नहीं किया जा सकता और मामले की गंभीरता से जांच कर इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए।

हालांकि, फेशियल रिकग्निशन, निगरानी और निजता से जुड़े संवैधानिक सवालों पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट स्वयं करेगा। इन मुद्दों पर फैक्ट फाइंडिंग कमेटी निर्णय नहीं लेगी।

छात्रों की FIR पर भी विचार

पीठ ने संकेत दिया कि Article 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल आरोपियों के मामलों को अलग से देखा जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से उन FIR की सूची भी मांगी है जिनमें ऐसे छात्रों को आरोपी बनाया गया है जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिनके खिलाफ मामला केवल प्रदर्शन में शामिल होने से संबंधित है।

छात्रों के भविष्य को लेकर अदालत गंभीर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला युवाओं के जीवन और भविष्य से जुड़ा हुआ है। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि माता-पिता अपनी मेहनत की कमाई से बच्चों की पढ़ाई कराते हैं और छात्रों को व्यवस्था से अपने भविष्य को लेकर जायज उम्मीदें हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here