
महंगाई पर प्रधानमंत्री को पत्र, शक्कर, तेल, दाल, चावल, गैस और पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने की मांग
रायपुर बढ़ती महंगाई को लेकर जैन संवेदना ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम कम करने की मांग की है। ट्रस्ट के महेंद्र कोचर और विजय चोपड़ा ने कहा कि आम जनता को GDP और थोक मूल्य सूचकांक के आंकड़ों से ज्यादा रसोई और बाजार में मिलने वाली वास्तविक राहत की जरूरत है।
ट्रस्ट पदाधिकारियों के मुताबिक, शक्कर, खाद्य तेल, दाल, चावल, सब्जियों, गैस और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि रोजमर्रा की चीजों के महंगे होने से लोगों की खरीद क्षमता घट रही है और कम सामान में ही घर का खर्च चलाना पड़ रहा है।
GDP के आंकड़ों से अलग महंगाई का असर
महेंद्र कोचर और विजय चोपड़ा ने कहा कि सरकार GDP और थोक मूल्य सूचकांक जैसे आंकड़ों के आधार पर महंगाई की स्थिति में सुधार की बात करती है, लेकिन आम लोगों को बाजार में इसका अपेक्षित असर महसूस नहीं हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस के दामों में राहत आखिर कब मिलेगी।
ट्रस्ट ने पत्र में विभिन्न खाद्य वस्तुओं और मसालों की कीमतों में बढ़ोतरी का भी दावा किया है। उनके अनुसार मसालों के दाम करीब 26 प्रतिशत, शक्कर 38 से 43 प्रतिशत, दालें 12 प्रतिशत, अनाज 16 प्रतिशत, चावल 25 प्रतिशत, दूध 20 प्रतिशत, घी 32 प्रतिशत और आटा 19 प्रतिशत तक महंगा हुआ है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों की समीक्षा की मांग
ट्रस्ट पदाधिकारियों ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ता है, जिससे अन्य वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित होती हैं। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दाम लंबे समय से स्थिर हैं।
जैन संवेदना ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री से पेट्रोल-डीजल की कीमतों की समीक्षा करने और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं के दाम कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। ट्रस्ट का कहना है कि **महंगाई से वास्तविक राहत तभी महसूस होगी, जब उसका असर आम परिवार के मासिक बजट और रसोई के खर्च पर दिखाई दे।**














