
नई दिल्ली UPI पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नए MDR ढांचे को “UPI टैक्स” बताते हुए इसका विरोध किया है। इसी बीच सरकार और बीजेपी की ओर से संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की एक रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है, जिसमें UPI के लिए एक टिकाऊ राजस्व मॉडल और टियर आधारित MDR व्यवस्था की सिफारिश की गई थी।
समिति में पांच कांग्रेस सांसद थे
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त संबंधी स्थायी समिति में कांग्रेस के पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ शामिल थे। सरकारी सूत्रों का कहना है कि 12 अगस्त को समिति ने रिपोर्ट को अपनाया और उस दौरान इन सदस्यों की ओर से कोई असहमति दर्ज नहीं की गई।
समिति ने UPI के लिए टियर आधारित MDR/राजस्व मॉडल को जल्द अधिसूचित और लागू करने की जरूरत बताई थी। रिपोर्ट में तर्क दिया गया था कि UPI के बढ़ते नेटवर्क को लंबे समय तक सिर्फ सरकारी सहायता के भरोसे चलाना वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं होगा।
राहुल गांधी ने बताया ‘UPI टैक्स’
वहीं, राहुल गांधी ने सरकार के नए MDR ढांचे का विरोध करते हुए इसे “UPI टैक्स” बताया है और इसे वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस की ओर से बाद में यह भी कहा गया कि समिति के समक्ष 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने का कोई प्रस्ताव या ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई थी। कांग्रेस सांसदों ने सरकार के इस दावे पर सवाल उठाए हैं कि समिति की सिफारिश मौजूदा MDR व्यवस्था के समर्थन के बराबर है।
यानी विवाद का एक अहम बिंदु यह है कि समिति की ओर से सुझाए गए टियर आधारित राजस्व मॉडल को क्या मौजूदा 0.4 प्रतिशत MDR व्यवस्था का समर्थन माना जाए या नहीं।
UPI की लागत और फंडिंग पर समिति की चिंता
समिति की रिपोर्ट में UPI इकोसिस्टम की लागत और उपलब्ध सरकारी सहायता के बीच अंतर का भी जिक्र किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, 2026-27 में UPI इकोसिस्टम की लागत को देखते हुए सरकार ने करीब 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, जबकि उद्योग की अनुमानित परिचालन लागत करीब 20,700 करोड़ रुपये बताई गई।
समिति ने कहा था कि UPI को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए ऐसा राजस्व मॉडल जरूरी है, जिससे सरकारी खजाने पर लगातार दबाव न पड़े। साथ ही, नेटवर्क के बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और भुगतान व्यवस्था में निवेश जारी रखने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत बताई गई थी।
15 अक्टूबर से लागू होना है नया MDR
सरकार के मौजूदा फैसले के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह शुल्क व्यापारी पक्ष पर है, ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाना है।
इस पूरे मुद्दे पर अब राजनीतिक बहस इस बात को लेकर है कि संसद की समिति की पुरानी सिफारिश और सरकार की मौजूदा MDR व्यवस्था के बीच कितना सीधा संबंध है। कांग्रेस जहां मौजूदा व्यवस्था का विरोध कर रही है, वहीं सरकार समिति की रिपोर्ट में दर्ज राजस्व मॉडल की सिफारिश को अपने पक्ष में रख रही है।

















