
आई.ई.आई. छत्तीसगढ़ राज्य केंद्र ने 59वां अभियंता दिवस मनाया, “सतत एवं प्रौद्योगिकीय रूप से संप्रभु भारत के लिए अभियांत्रिकी उत्कृष्टता” विषय पर तकनीकी व्याख्यान आयोजित
रायपुर: द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), छत्तीसगढ़ राज्य केंद्र, रायपुर द्वारा शनिवार 19 सितम्बर 2026 को भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया की स्मृति में 59वां अभियंता दिवस सीजीआईटी परिसर, सेजबहार, रायपुर में मनाया गया। इस अवसर पर “सतत एवं प्रौद्योगिकीय रूप से संप्रभु भारत के लिए अभियांत्रिकी उत्कृष्टता” विषय पर तकनीकी व्याख्यान आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एम. आर. खान, प्राचार्य, सीजीआईटी, रायपुर थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री डी. के. प्रधान, इंजीनियर-इन-चीफ (सेवानिवृत्त), लोक निर्माण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा डॉ. आलोक साहू, निदेशक, सिपेट, रायपुर उपस्थित रहे।
स्वागत एवं शुभारंभ:
कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्र के मानसेवी सचिव डॉ. अजय त्रिपाठी के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने सर एम. विश्वेश्वरैया के जीवन एवं योगदान पर प्रकाश डाला।
अध्यक्ष का संबोधन:
राज्य केंद्र के अध्यक्ष इंजी. पुनीत चौबे ने सततता एवं प्रौद्योगिकीय संप्रभुता पर अपने विचार रखे। उन्होंने भारत और चीन की विकास यात्रा की तुलना करते हुए कहा कि समान स्थिति से शुरुआत करने के बावजूद चीन ने काफी तेज़ प्रगति की है, जबकि भारत आज भी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के लिए अन्य देशों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आत्म निर्भर भारत, सेमीकंडक्टर मिशन तथा ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत भारत इस दिशा मे दुनिया में तकनीक के क्षेत्र में आत्म निर्भर बनेगा।
पूर्व पदाधिकारियों का सम्मान:
आगे बढ़ने से पूर्व आईईआई छत्तीसगढ़ राज्य केंद्र के पूर्व अध्यक्षों एवं मानद सचिवों का सम्मान किया गया। सम्मानित होने वाले इंजीनियर हैं:
– इंजी. एल. एन. तिवारी
– इंजी. एस. एन. भटनागर
– इंजी. डी. पी. शर्मा
– इंजी. वी. के. कासू
– इंजी. के. के. वर्मा
प्लास्टिक का पुनर्अभियांत्रिकीकरण:
सिपेट:आईपीटी रायपुर के प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं प्रमुख डॉ. आलोक साहू ने “री-इंजीनियरिंग प्लास्टिक्स: हरित एवं संप्रभु भारत के लिए स्मार्ट रीसाइक्लिंग और टिकाऊ सामग्री नवाचार” विषय पर व्याख्यान दिया। उनका मूल संदेश था, “समाधान आयात न करें, उन्हें स्वयं इंजीनियर करें।” उन्होंने कहा कि असली चुनौती प्लास्टिक नहीं, बल्कि एकल-उपयोग और कचरा फैलाने की प्रवृत्ति है। प्लास्टिक खाद्य संरक्षण, स्वास्थ्य सेवा, जल अधोसंरचना और स्वच्छ ऊर्जा में सहायक है। उन्होंने बताया कि भारत में केवल लगभग 13% प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण होता है।
इसे बढ़ाने के लिए उन्होंने इन उपायों पर प्रकाश डाला:
– एआई-आधारित एवं स्पेक्ट्रोस्कोपिक छंटाई
– पायरोलिसिस जैसी उन्नत रीसाइक्लिंग
– सीमेंट भट्ठों में को-प्रोसेसिंग
– प्लास्टिक सड़कें
– बहुपरतीय लैमिनेट के स्थान पर पुनर्चक्रण योग्य मोनो-मटेरियल पैकेजिंग
उन्होंने बायोप्लास्टिक पर भी चर्चा की, जिनकी लागत और प्रदर्शन संबंधी कमियाँ अभी उनकी हिस्सेदारी सीमित रखती हैं। साथ ही प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों में 2026 के संशोधनों की जानकारी दी, जिनमें चार-रंग आधारित कचरा पृथक्करण प्रावधान शामिल है। उन्होंने अपशिष्ट के लक्षण-निर्धारण, मात्रात्मक आकलन और प्रणाली-डिज़ाइन पर आधारित विज्ञान-संचालित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया और क्षेत्रीय उद्योगों व संस्थानों के लिए सिपेट रायपुर की शैक्षणिक, परीक्षण एवं तकनीकी सहायता सेवाओं का उल्लेख किया।
सतत भवन निर्माण:
विशिष्ट अतिथि श्री डी. के. प्रधान ने भवनों की योजना के स्तर से ही सततता को शामिल करने पर बल दिया। उन्होंने कुशल वेंटिलेशन एवं खिड़की योजना, ग्रे-वॉटर पुनःउपयोग, सोलर पैनल, लाइट-ट्यूब अवधारणा तथा बहुमंजिला इमारतों में विद्युत उत्पादन हेतु माइक्रो-टर्बाइन की चर्चा की। उन्होंने पुनर्चक्रित एवं टिकाऊ सामग्रियों के उपयोग की वकालत की, जैसे फ्लाई-ऐश सीमेंट व ईंटें, पुनर्चक्रित एग्रीगेट, निर्मित रेत (एम-सैंड), पुनर्चक्रित स्टील, कार्बन-फाइबर स्टील, प्रीफैब्रिकेटेड संरचनाएँ और एएसी ब्लॉक। उन्होंने प्लास्टिसाइज़र व क्योरिंग कंपाउंड के माध्यम से पानी की खपत घटाने, मोर्टार की मोटाई कम रखने और निर्माण अपशिष्ट के पुनर्चक्रण की सलाह दी। साथ ही अत्यधिक रेत खनन से नदी पारिस्थितिकी तंत्र एवं पुलों पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव की ओर ध्यान आकर्षित किया।
विद्यार्थियों को संदेश:
मुख्य अतिथि डॉ. एम. आर. खान ने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी, उनके विचारों को सुनने और मजबूत बुनियादी ज्ञान के निर्माण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने अभियांत्रिकी को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बीच का सेतु बताया। श्री खान ने विद्यार्थियों से सतत अभियांत्रिकी के माध्यम से उत्कृष्टता प्राप्त करने का आग्रह करते हुए उन्होंने नवाचार की आर्थिक वास्तविकताओं और लागत घटाने हेतु समाधानों को अनुकूलित करने की आवश्यकता की याद दिलाई। उन्होंने व्यावहारिक समस्या-समाधान के उदाहरण के रूप में सॉलिड वेस्ट हैकाथॉन के आयोजन का अपना अनुभव भी साझा किया। श्री खान ने इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया से अनुरोध किया कि वह इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों और उद्योग जगत के बीच समन्वय कर उनके ज्ञान को नवीन तकनीकों से अद्यतन करने में सहयोग दें।
आभार प्रदर्शन:
कार्यक्रम का समापन केंद्र के काउंसिल सदस्य (मेटलर्जिकल डिवीजन) इंजी. ए. वाय. वी. चेनुलु द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि , विशिष्ट अतिथियों तथा महाविद्यालय प्रबंधन का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर डा आर एस परिहार, डा श्वेता चौबे, डा एन बी सिंह, इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के सदस्य, महाविद्यालय के संकाय सदस्य , राज्य शासन के अधिकारी, छात्र छात्रा उपस्थित थे।






















