टाइड ग्रांट से बिजली बिल भुगतान पर उठे सवाल, ₹32.99 करोड़ के खर्च का मांगा हिसाब

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रायपुर। नगरीय निकायों को पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था के लिए मिलने वाले 15वें वित्त आयोग के टाइड ग्रांट से 32.99 करोड़ रुपये के बिजली बिलों का भुगतान किए जाने पर सवाल उठे हैं। महालेखाकार (AG) ऑडिट ने इस खर्च पर आपत्ति दर्ज करते हुए इसे निर्धारित प्रावधानों के विपरीत बताया है।

ऑडिट आपत्ति के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने मामले की जांच शुरू कर दी है। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा और बस्तर संभाग के सभी नगरीय निकायों से बिजली बिल भुगतान से जुड़ी मूल नस्तियां, स्वीकृति आदेश और अन्य दस्तावेज मांगे गए हैं।

किस निकाय ने कितना खर्च किया, मांगी जानकारी

संचालनालय के संचालक नीलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने संयुक्त संचालकों को बिंदुवार जानकारी जुटाकर महालेखाकार को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग यह पता कर रहा है कि किस नगरीय निकाय ने टाइड ग्रांट से कितनी राशि बिजली बिलों के भुगतान में खर्च की और भुगतान की मंजूरी किस स्तर पर दी गई।

इसके साथ ही संबंधित भुगतान की मूल फाइलें और स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज भी तलब किए गए हैं।

टाइड ग्रांट से बिजली बिल चुकाने पर आपत्ति

केंद्र सरकार के 2 जुलाई 2024 के दिशा-निर्देश और राज्य सरकार के 10 जनवरी 2025 के आदेश के मुताबिक टाइड ग्रांट की अधिकतम 10 प्रतिशत राशि पाइपलाइन, कचरा प्लांट जैसी सेवाओं के संचालन एवं संधारण (O&M) पर खर्च की जा सकती है। इसके लिए सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति और असाधारण परिस्थितियों का प्रावधान बताया गया है।

ऐसे में ऑडिट ने सवाल उठाया है कि बिजली बिलों के भुगतान को टाइड ग्रांट के खर्च में किस आधार पर शामिल किया गया और क्या इसके लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी।

निकायों की अपनी आय से होने हैं नियमित खर्च

विभागीय प्रावधानों के अनुसार बिजली बिल और स्थापना से जुड़े नियमित खर्च निकायों की अपनी आय, जैसे टैक्स, यूजर चार्ज और अन्य स्थानीय स्रोतों से किए जाने होते हैं। इसलिए जांच में यह भी देखा जा रहा है कि अपनी आय के स्रोत उपलब्ध होने के बावजूद टाइड ग्रांट से बिजली बिलों का भुगतान क्यों किया गया।

कार्यपालन अभियंता स्तर की मंजूरी पर भी सवाल

महालेखाकार की आपत्ति में बिजली बिलों के भुगतान के लिए कार्यपालन अभियंता स्तर से राशि मंजूर किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। अब विभाग यह जांच कर रहा है कि किस निकाय को कितनी टाइड ग्रांट मिली, उसका इस्तेमाल किन बिलों के भुगतान में हुआ और मंजूरी के दौरान नियमों का पालन किया गया या नहीं।

विभाग ने मांगी 12 बिंदुओं पर जानकारी

जांच के लिए विभाग ने नगरीय निकायों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और जानकारियां मांगी हैं। इनमें 2 जुलाई 2024 की केंद्रीय गाइडलाइन, सक्षम अधिकारी की लिखित मंजूरी, बिजली बिल भुगतान को असाधारण परिस्थिति मानने का आधार, 2021-22 से 2025-26 तक O&M खर्च और अनुमति देने वाले अधिकारी की जानकारी शामिल है।

इसके अलावा विभाग ने टैक्स वसूली की स्थिति, अपनी आय के बावजूद अनुदान से भुगतान करने का कारण, आर्थिक असमर्थता का प्रमाण, मूल नस्तियां और टैक्स, यूजर चार्ज, जलकर, किराया, भवन अनुज्ञा तथा लाइसेंस-पंजीयन से हुई आय का वर्षवार ब्योरा भी मांगा है।

साथ ही टाइड ग्रांट, O&M प्रावधान और वास्तविक खर्च का पांच वर्षों का तुलनात्मक विवरण भी मांगा गया है।

दस्तावेजों की जांच के बाद साफ होगी स्थिति

महालेखाकार की आपत्ति के बाद मूल नस्तियां और स्वीकृति संबंधी दस्तावेज तलब किए जाने से अब यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ₹32.99 करोड़ के बिजली बिलों का भुगतान किन परिस्थितियों में टाइड ग्रांट से किया गया और निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।

विभागीय जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही नियमों के अनुपालन और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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