
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ‘चौकीदार चोर है’ से जुड़े कथित आपराधिक मानहानि मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने उनके खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों से जुड़ा है।
एकल पीठ के न्यायमूर्ति नितिन बोरकर ने राहुल गांधी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल है और इसलिए उसे एक पहचान योग्य संस्था माना जा सकता है। शिकायतकर्ता ने खुद को लंबे समय से BJP का सक्रिय सदस्य बताया है।
अदालत ने क्या कहा?
अदालत के अनुसार, प्रधानमंत्री और BJP के सदस्यों को लेकर की गई कथित टिप्पणी को पहली नजर में केवल पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं तक सीमित नहीं माना जा सकता। टिप्पणी का वास्तविक अर्थ क्या था और उसका पार्टी के सदस्यों की प्रतिष्ठा पर क्या प्रभाव पड़ा, इसका फैसला मामले की सुनवाई के दौरान तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने कहा कि उसे मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए समन और मामले को आगे बढ़ाने के आदेश में ऐसा कोई कानूनी आधार नहीं मिला, जिसके चलते पूरी कार्यवाही को रद्द किया जा सके।
शशि थरूर मामले का भी दिया हवाला
फैसले में अदालत ने कांग्रेस नेता शशि थरूर से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया। उस मामले में यह माना गया था कि पंजीकृत राजनीतिक पार्टी को एक पहचान योग्य और निश्चित संस्था माना जा सकता है।
राहुल गांधी की याचिका पर अदालत ने शिकायतकर्ता, राहुल गांधी और महाराष्ट्र सरकार की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
BJP कार्यकर्ता ने दर्ज कराई थी शिकायत
मामले की शुरुआत BJP कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल की शिकायत से हुई थी। उन्होंने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि राहुल गांधी की कथित टिप्पणियां प्रधानमंत्री के साथ-साथ BJP और उसके सदस्यों को भी निशाना बनाती हैं।
शिकायतकर्ता का दावा था कि प्रधानमंत्री को ‘चोरों का सरदार’ या ‘कमांडर-इन-थीफ’ कहने वाली टिप्पणी का असर BJP के सदस्यों की प्रतिष्ठा पर भी पड़ा। इसी आधार पर उन्होंने आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी।
राहुल गांधी की ओर से क्या दलील दी गई?
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप पसबोला ने अदालत में तर्क दिया था कि संबंधित ट्वीट में राहुल गांधी ने न तो BJP का नाम लिया था और न ही किसी स्पष्ट, पहचान योग्य या निश्चित समूह को निशाना बनाया था।
उनका कहना था कि केवल इस आधार पर कि किसी बयान का अर्थ राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं से जोड़कर निकाला जा सकता है, आपराधिक मानहानि का मामला कायम नहीं किया जा सकता। उन्होंने शिकायतकर्ता के मुकदमा दायर करने के अधिकार पर भी सवाल उठाया था।
हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और राहुल गांधी की याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत में चल रही कार्यवाही को जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया।


















