
नई दिल्ली
भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है।
एक साल में 15.6% की बड़ी बढ़त
पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये था। इस बार इसमें 15.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो रक्षा क्षेत्र में तेजी से बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाती है।
12 साल में चार गुना वृद्धि
अगर पिछले एक दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2013-14 में भारत का रक्षा उत्पादन केवल 43,746 करोड़ रुपये था। अब यह बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है। यानी करीब चार गुना वृद्धि दर्ज हुई है।
प्राइवेट सेक्टर का बढ़ा योगदान
रक्षा उत्पादन में सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी अभी भी सबसे अधिक है। कुल उत्पादन में 76% योगदान डीपीएसयू (सरकारी कंपनियों) का रहा। वहीं प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी 22% से बढ़कर 24% हो गई है। निजी कंपनियों ने अकेले 42 हजार करोड़ रुपये का योगदान दिया।
हथियार आयातक से निर्यातक बनने की ओर भारत
एक समय भारत दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में शामिल था। अब भारत न केवल अपनी रक्षा जरूरतों के लिए स्वदेशी हथियार बना रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में हथियार निर्यात भी बढ़ा रहा है।
पीएम मोदी और रक्षा मंत्री ने जताई खुशी
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस उपलब्धि को आत्मनिर्भर भारत, तकनीकी नवाचार और स्वदेशी निर्माण का परिणाम बताया।
वहीं रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कहा कि यह सफलता सरकारी और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों का नतीजा है।
आत्मनिर्भर भारत को मिली मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा उत्पादन में यह उछाल भारत को रक्षा तकनीक, रणनीतिक शक्ति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नई मजबूती देगा।



















