विश्व आदिवासी दिवस पर जिलेभर में लगे विधिक जागरूकता शिविर

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बेमेतरा । विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बेमेतरा जिले के विभिन्न छात्रावासों, शैक्षणिक संस्थानों और जिला जेल में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के स्टेट प्लान ऑफ एक्शन कैलेंडर 2026-27 के तहत आयोजित इन शिविरों का उद्देश्य लोगों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी देना था।

कार्यक्रम प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बेमेतरा श्रीमती सरोज नन्द दास के मार्गदर्शन में तथा सचिव श्रीमती स्वर्णलता ओम यादव की उपस्थिति में आयोजित किए गए।

छात्राओं को अधिकारों और कानूनों की जानकारी

प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालिका छात्रावास, बेमेतरा में आयोजित शिविर में छात्र-छात्राओं को संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार और कर्तव्यों, अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक अधिकार, शिक्षा एवं समानता का अधिकार, बाल अधिकार और बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों की जानकारी दी गई।

विद्यार्थियों को बाल विवाह, बाल श्रम, शोषण और भेदभाव जैसी परिस्थितियों में उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में भी बताया गया। इस दौरान नालसा की विभिन्न योजनाओं, 15100 विधिक सेवा हेल्पलाइन, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन, बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006, पॉक्सो एक्ट 2012, हिट एंड रन स्कीम 2022 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की जानकारी दी गई।

कई छात्रावासों में भी हुए कार्यक्रम

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकार मित्रों और लीगल एड डिफेंस कौंसिल के माध्यम से जिले के विभिन्न छात्रावासों और शैक्षणिक संस्थानों में भी जागरूकता शिविर लगाए गए। इनमें कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय बेमेतरा, अनुसूचित जाति बालक छात्रावास कोबिया, अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास बेमेतरा, अनुसूचित जाति बालक छात्रावास साजा, अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास बेमेतरा और अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास बेरला शामिल रहे।

इन कार्यक्रमों में छात्र-छात्राओं के साथ छात्रावासों के अधीक्षक-अधीक्षिका, शिक्षक, लीगल एड डिफेंस कौंसिल के अधिवक्ता और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकार मित्र मौजूद रहे।

जिला जेल में बंदियों को भी दी गई जानकारी

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिला जेल बेमेतरा में भी विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। यहां निरुद्ध बंदियों को आदिवासी समुदाय के संवैधानिक संरक्षण, उनके अधिकारों और उपलब्ध कानूनी सहायता सेवाओं के बारे में जानकारी दी गई।

बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता और न्याय तक पहुंच के अधिकार से अवगत कराते हुए उपलब्ध सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया।

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