
छत्तीसगढ़ में निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष मंथन: द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) द्वारा ‘सतत भविष्य’ विषय पर पैनल चर्चा आयोजित

रायपुर: द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), छत्तीसगढ़ राज्य केंद्र द्वारा जी ई सी – एन आई टी रायपुर एलुमनी एसोसिएशन के सहयोग से शनिवार दिनांक 08 अगस्त 2026 को “निर्माण अपशिष्ट का पुनर्चक्रण: एक सतत् भविष्य की ओर””विषय पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया।
पैनल चर्चा में विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ एन वी रमना राव , निदेशक एन आई टी रायपुर , डा प्रदीप कुमार घोष, उप कुलपति डा सी वी रमन विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं श्री योगेश कुमार कडु, कार्यपालन अभियंता, नगर निगम रायपुर उपस्थित थे| डा समीर बाजपेयी, प्राध्यापक, एन आई टी रायपुर ने मॉडरेटर की भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की छत्तीसगढ़ शाखा के अध्यक्ष श्री पुनीत चौबे ने अपने स्वागत उद्बोधन में द इंस्टीट्यूशन आफ इंजीनियर्स की गतिविधियों और उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी। श्री चौबे ने विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कंस्ट्रक्शन वेस्ट सिर्फ भारत जैसे विकसित देश की समस्या नहीं है अपितु पूरे विश्व मे इसके वैज्ञानिक निष्पादन तथा पुनः उपयोग के बारे में गंभीर मंथन एवं प्रयास हो रहे हैं।
श्री उमेश चितलांगिया, अध्यक्ष जी ई सी – एन आई टी रायपुर एलुमनी एसोसिएशन ने द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), छत्तीसगढ़ राज्य केंद्र को इतने महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा आयोजित करने के लिए बधाई दी तथा उन्होंने सुझाव दिया कि न केवल कंस्ट्रक्शन वेस्ट बल्कि हमें भविष्य में औद्योगिक अपशिष्ट के प्रबंधन एवं निष्पादन पर भी एक पैनल चर्चा आयोजित करनी चाहिए|
निदेशक एन आई टी रायपुर , डॉ एन वी रमना राव ने अपने प्रस्तुतीकरण में कंस्ट्रक्शन एवं डेमोलिशन वेस्ट के रीसाइक्लिंग पर जोर देते हुए कहा कि इसके माध्यम से उपयोगी सामग्री की रिकवरी करके उसका निर्माण कार्यों में उपयोग किया जा सकता है | उन्होंने बताया कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कंस्ट्रक्शन एवं डेमोलिशन वेस्ट का निराकरण आर्थिक रूप से व्यवहारीक नहीं है इसलिए अनेक राज्यों द्वारा बड़े बिल्डर्स को न्यूनतम 5 प्रतिशत रीसायकल सामग्री के उपयोग को बंधनकारी किया है तथा उल्लंघन पर जुर्माना का प्रावधान किया गया है | डॉ एन वी रमना राव ने कहा कि इस दिशा में अभी और अधिक अनुसंधान की आवश्यकता है ताकि यह आर्थिक रूप से भी लाभप्रद बने और कम जल की खपत हो | चूँकि अभी अधिकतर स्थानों में कंस्ट्रक्शन एवं डेमोलिशन वेस्ट के प्रबंधन की व्यवस्था नहीं है अत: कंस्ट्रक्शन एवं डेमोलिशन वेस्ट म्युनिसिपल कचरे में मिल जा रहा है जिससे दोनों कचरे के निष्पादन में अनेक प्रकार की चुनौतियां आ रही हैं | उन्होंने रीसाइकिल्ड वेस्ट के उपयोग में आने वाली चुनौतियों जैसे पोरोसिटी, सामर्थ्य में भिन्नता आदि के बारे में बताया और रीसाइकिल्ड वेस्ट की उपयोगिता का आकलन करने के लिए किए जाने वाले विभिन्न परीक्षणों की जानकारी दी|
डा समीर बाजपेयी, प्राध्यापक एन आई टी रायपुर ने पैनल चर्चा की शुरुआत करते हुए कंस्ट्रक्शन वेस्ट में वृद्धि और इसके व्यवस्थित प्रबंधन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला| उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत के कुछ ही शहरों में कंस्ट्रक्शन एवं डेमोलिशन वेस्ट के वैज्ञानिक निष्पादन की सुविधा कार्य कर रही है | श्री बाजपेयी ने विकसित होते छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना से जुड़े इस अत्यंत महत्त्वपूर्ण कारक पर ध्यान दिए जाने पर जोर दिया |
डा प्रदीप कुमार घोष, उप कुलपति सी वी रमन विश्वविद्यालय बिलासपुर ने बताया कि पुरे भारत में प्रतिवर्ष लगभग 15 करोड़ से 50 करोड़ टन निर्माण अपशिष्ट उत्पन्न हो रहा जिसमे से मात्र २ से ३ प्रतिशत का प्रबंधन वैज्ञानिक ढंग से हो पा रहा है | उन्होंने नयी दिल्ली स्थित बुराड़ी में भारत के सबसे बड़े कंस्ट्रक्शन एवं डेमोलिशन वेस्ट प्रसंस्करण सुविधा के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी साझा की| डा घोष ने बताया कि नोएडा में एक ईमारत को तोड़ने में 2 दिन लगे जबकि उस जगह से मलबा हटाने में ढाई माह का समय लगा इससे कंस्ट्रक्शन वेस्ट के निष्पादन की जटिलता को समझा जा सकता है |
श्री योगेश कुमार कडु, कार्यपालन अभियंता, नगर निगम रायपुर ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सन 2016 तथा 2025 में कंस्ट्रक्शन एवं डिमोलिशन वेस्ट के विषय में जारी अधिसूचना के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने रायपुर नगर निगम द्वारा कंस्ट्रक्शन वेस्ट रीसाइक्लिंग के लिए उठाए गए अन्य कदमों की जानकारी दी, साथ ही वेस्ट मैनेजमेंट में आने वाली चुनौतियों का उल्लेख किया। श्री योगेश कडू ने सुझाव दिया कि रीसायकल सामग्री के उपयोग से रॉयल्टी की भी बचत होगी | उन्होंने सुझाव दिया कि जिन परियोजनाओं में कंस्ट्रक्शन एवं डेमोलिशन वेस्ट की मात्रा अधिक हो वहां अनुमति कि शर्तों में इन कचरों के वैज्ञानिक निष्पादन की शर्त भी हो |
श्री अनिकेत चौबे, श्री आर्यंश पाण्डेय, केमिकल इंजीनियरिंग विभाग, एनआईटी रायपुर के स्नातकोत्तर शोध छात्रों ने भी कंस्ट्रक्शन एंड वेस्ट मैनेजमेंट पर प्रस्तुति दी
पैनल चर्चा के बाद हुए प्रश्न-उत्तर सत्र में प्रतिभागियों के प्रश्नों का पैनल सदस्यों ने बहुत अच्छी तरह उत्तर दिया। अध्यक्ष श्री पुनीत चौबे ने सभी पैनल सदस्यों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। कार्यसमिति के सदस्य डा के के घोष ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। कार्यक्रम का संचालन एनआईटी रायपुर के छात्र श्री आयुष और श्री मंजरी ने किया
कार्यक्रम में नालको के पूर्व निदेशक श्री अरुण शर्मा, भिलाई इस्पात संयंत्र के पूर्व कार्यपालक निदेशक श्री योगेश डेगन, छत्तीसगढ़ बिजली बोर्ड के पूर्व मुख्य अभियंता श्री वी के कासू, द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), छत्तीसगढ़ राज्य केंद्र तथा जी ई सी – एन आई टी रायपुर एलुमनी एसोसिएशन के वरिष्ट अभियंता सदस्य, एन आई टी रायपुर के के सम्मानित संकाय सदस्य एवं छात्र छात्रा उपस्थित थे।

















