
रायपुर/सिंगापुरभाषा अस्मिता अकादमी और छत्तीसगढ़ मित्र, भारत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव पुस्तक विमोचन, सम्मान समारोह और विचार मंथन के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह आयोजन सिंगापुर के लिटिल इंडिया स्थित शिवम रेस्टोरेंट के सभागार में हुआ।
भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुआ मंथन
“भारतीय ज्ञान परंपरा का विश्व को प्रदेय” विषय पर आयोजित मुख्य समारोह का शुभारंभ सिंगापुर की हिंदी लेखिका नीतू गुजराल के मुख्य आतिथ्य और अंतरराष्ट्रीय कमेंटेटर जसवंत क्लाडियस की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत उर्मिला देवी उर्मि की सरस्वती वंदना और ज्योत्स्ना सक्सेना के नेतृत्व में सहज योग से हुई।
कई पुस्तकों का हुआ विमोचन
महोत्सव के दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण किया गया, जिनमें “सिंगापुर आगे बढ़ो”, “छत्तीसगढ़ का अनचीन्हा संगीतमय अतीत”, “कुकड़ू कूं”, “झंकृत निनाद”, “गुरु घासीदास”, छत्तीसगढ़ मित्र का नवीनतम अंक और “श्री हिंगुलाज चालीसा” शामिल रहीं।
साहित्यकारों को मिला सम्मान
समारोह में कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों और लेखकों को सम्मानित किया गया।
- जसवंत क्लाडियस — मार्क टुली सम्मान
- शीलकांत पाठक — श्रीकांत वर्मा सम्मान
- डॉ आर.के. सुखदेवे — नागार्जुन सम्मान
- बी.पी. पारकर — इंद्रु केंवट सम्मान
- डॉ अर्चना पाठक — अनीता सेन सम्मान
- ज्योत्स्ना सक्सेना — सुभद्रा कुमारी चौहान सम्मान
- सीमा अवस्थी — निरुपमा शर्मा सम्मान
- उर्मिला देवी उर्मि — महादेवी वर्मा सम्मान
हिंदी के वैश्विक प्रसार पर जोर
संगोष्ठी में वक्ताओं ने हिंदी और भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक भूमिका पर विचार रखे। मुख्य अतिथि नीतू गुजराल ने कहा कि हिंदी साहित्य और संस्कृति ने विश्व को नैतिक मूल्यों का मार्ग दिखाया है। वहीं जसवंत क्लाडियस ने कहा कि हिंदी आज सौ से अधिक देशों में अपनी पहचान बना चुकी है।
काव्य गोष्ठी भी रही खास
कार्यक्रम के अंतिम चरण में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें देश-विदेश से आए कवियों ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
भारत से पहुंचा 32 सदस्यीय दल
महोत्सव के तहत भारत से पहुंचे 32 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 13 से 17 जून तक सिंगापुर के सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण किया।



















