
डॉ. प्रकाश चन्द्र ताम्रकार
विभागाध्यक्ष (आईडीडी), शासकीय कन्या पॉलिटेक्निक, रायपुर
परिचय
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कम्प्यूटर विज्ञान की एक शाखा है जो यंत्रो और साफ्टवेयर को बुद्धि के साथ विकसित करता है । यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें यंत्रों और कम्प्यूटर प्रणाली को मानव की तरह सोचने समझने और निर्णय लेने की क्षमता दी जाती है । इसे मशीनों को स्मार्ट बनाने की कला भी कहा जा सकता है जिससे ये मानवों की तरह कार्य कर सकें ।
विकास
1955 में जान मेकार्थी ने इस विधा का नाम कृत्रिम बुद्धि रखा और इसे विज्ञान और इंजीनियरिंग के द्वारा बुद्धिमान मशीन बनाने के रूप में परिभाषित किया। कृत्रिम बुद्धि का वैज्ञानिको ने 1956 में अध्ययन करना प्रारंभ किया। इसके इतिहास में अनेक आशावादी लहरें आती रही, फिर असफलताओं निराशा, फिर नये तरीके जो आशान्वित करते । ए आई शोध को उपक्षेत्रों में विभाजित किया गया जो प्रायः एक दूसरे के साथ संवाद करने में विफल रहते थे । ये उपक्षेत्र तकनीकी विचारों पर आधारित हैं जैसे विशेष लक्ष्य, विशेष उपकरण या गहरे तात्विक अंतर । उपक्षेत्र सामाजिक कारकों पर भी निर्भर है । इसके लक्ष्य में तर्क, ज्ञान की योजना बनाना, सीखना, भाषा पहचानना, धारण करना, वस्तुओं में हेर फेर की क्षमता व कुशल उपयोग करना शामिल है। वर्तमान में इस लक्ष्य में पहुंचने के लिए सांख्यिकी विधियों कम्प्यूटेशनल बुद्धि और पारंपरिक खुफिया तकनीक सहित गणित, मनोविज्ञान, भाषा विज्ञान, तत्व विज्ञान सहित अनेक अन्य क्षेत्र शामिल हैं ।
सीमाएं
ए आई दायरा विवादित है क्योंकि मशीनें तेजी से सक्षम हो रही है ।जिन कार्यों के लिए पहले मानवीय बुद्धि चाहिए थे वह अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में आ गए हैं । उदाहरण के लिए लिखे हुए शब्दों को पहचानने में मशीन सक्षम हो गई है । आज कल ए आई के दायरे में मानवीय वाणी को समझना, शतरंज के खेल में माहिर व्यक्तियों से जीतना, बिना मानव के गाड़ी चलाना इत्यादि। इस वैज्ञानिक क्षेत्र को इतने सटीक रूप से वर्णित किया जा सकता है कि इसे नकल करने के लिए एक मशीन बनाई जा सकती है । यह मन की प्रकृति और मानव बुद्धि के साथ कृत्रिम प्राणियों के निर्माण के नैतिकता के बारे में प्रश्न उठाता है जो प्राचीन काल से कथाओं के द्वारा खोजे गये हैं । अगर यह अनावश्यक रूप से प्रगति करता है तो इसे कुछ लोग मानवता के लिए खतरा मानते हैं । कुछ लोगों का मानना है कि यह बड़े पैमाने बेरोजगारी का खतरा पैदा करेगा ।
लाभ
ए आई से जुड़े नये कौशल और भूमिकाओं की मांग बढ़ रही है । ए आई निवेश से तकनीकी के अलावा सेवाओं उत्पादकता और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों को लाभ हो सकता है । कंपनियां अब एक आई का इस्तेमाल करने में सक्षम कर्मियों को प्राथमिकता दे रही है । बैंकिंग बैंक आफिस संचालन, ग्राहक सेवा और गुणवत्ता जांच जैसे क्षेत्रों में एक आई और स्वचालन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ए आई के कारण 32000 नौकरियों में कटौती या छंटनी हुई है लेकिन 83000 नौकरियां ए आई के कारण या उससे जुड़े क्षेत्रों में पैदा हुई है । ए आई इंजीनियरिंग माडल संचालन, डाटा प्रबंधन, ए आई एकीकरण और ए आई आधारित कारोबारी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ी है ।
सावधानी
ए आई का प्रयोग बहुत सावधानी से करने की आवश्यकता है । इसके प्रयोग से पूर्व यदि मूलभूत वांछित जानकारी ज्ञात होना चाहिए। यदि ज्ञात न हो तो ए आई से प्राप्त जानकारी गलत, निरर्थक और खतरनाक भी हो सकता है । अति आत्मविश्वास से बचना चाहिए। ए आई पर निर्भरएता स्वयं के बौद्धिक विकास में बाधक हो सकता है ।



















