भारत को अमेरिका से बड़ी राहत! चुनिंदा दवाओं और फार्मा सामग्री पर जीरो टैरिफ

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वॉशिंगटन/नई दिल्ली । अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कुछ चुनिंदा फार्मास्युटिकल उत्पादों और उन्हें तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को जीरो टैरिफ वाली श्रेणी में शामिल किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका कुछ पेटेंट वाली दवाओं और संबंधित फार्मा सामग्री पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू करने की तैयारी कर रहा है।

हालांकि, इस फैसले का लाभ भारत से अमेरिका जाने वाली सभी दवाओं को नहीं मिलेगा। जीरो टैरिफ की सुविधा केवल निर्धारित उत्पादों तक सीमित रहेगी।

इन दवाओं को मिलेगी छूट

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जीरो टैरिफ वाली सूची में कई विशेष श्रेणी के फार्मा उत्पाद शामिल हैं। इनमें ऑरफन ड्रग्स, न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा आधारित थेरेपी, फर्टिलिटी दवाएं, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स शामिल हैं।

इसके अलावा कुछ मेडिकल उत्पाद और पशु-स्वास्थ्य से जुड़े उत्पाद भी इस सूची में शामिल किए गए हैं।

भारत के अलावा अर्जेंटीना, बांग्लादेश, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, थाईलैंड और वियतनाम समेत कई अन्य देश और क्षेत्र भी इस व्यवस्था के पात्र हैं।

29 सितंबर से 100% टैरिफ का प्रावधान

अमेरिका की मौजूदा नीति के तहत कुछ पेटेंट वाली दवाओं और संबंधित सामग्री पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था अमेरिकी व्यापार विस्तार कानून की धारा 232 के तहत लागू की जा रही है। अलग-अलग श्रेणियों के आयातकों के लिए इसके लागू होने की तारीख अलग है, जिसमें कुछ मामलों में 29 सितंबर 2026 से प्रभावी होने का प्रावधान है।

वहीं, जेनेरिक दवाओं और उनसे संबंधित सामग्री को इस विशेष फार्मा टैरिफ से अलग रखा गया है। यह भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय फार्मा कंपनियां अमेरिकी बाजार में जेनेरिक दवाओं की बड़ी आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हैं।

भारतीय फार्मा कंपनियों पर क्या असर?

भारत से अमेरिका को तैयार दवाओं के अलावा एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) और विशेष उपचारों से जुड़े उत्पादों का भी निर्यात होता है। ऐसे में निर्धारित हाई-वैल्यू और स्पेशलिटी फार्मा उत्पादों पर जीरो टैरिफ की सुविधा मिलने से संबंधित भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में लागत के लिहाज से राहत मिल सकती है।

हालांकि, यह छूट पूरे भारतीय फार्मा क्षेत्र पर लागू नहीं होगी। जिन उत्पादों को सूची में शामिल नहीं किया गया है, उन पर लागू अमेरिकी टैरिफ नियम अपनी जगह बने रहेंगे।

अमेरिका का घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर

अमेरिका की व्यापक फार्मा नीति में घरेलू स्तर पर दवाओं के उत्पादन को बढ़ावा देना भी शामिल है। इसलिए चुनिंदा उत्पादों को मिली टैरिफ छूट को अमेरिकी घरेलू फार्मा उत्पादन बढ़ाने की नीति में व्यापक बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।

फिलहाल भारत के लिए प्रमुख बात यह है कि निर्धारित श्रेणियों की दवाओं और फार्मा सामग्री को अमेरिकी बाजार में बिना अतिरिक्त टैरिफ प्रवेश का अवसर मिलेगा, जबकि अन्य उत्पादों के लिए मौजूदा टैरिफ व्यवस्था लागू रहेगी।

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