
गणेश और दुर्गा पंडाल समेत धार्मिक, राजनीतिक व सामाजिक आयोजनों पर निगम की सख्ती; बिना अनुमति पंडाल लगाने पर होगी कार्रवाई, डीजे रहेगा प्रतिबंधित
धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों के लिए सड़क किनारे पंडाल लगाने से पहले अब नगर पालिक निगम रिसाली से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। आयोजन समिति को अनुमति शुल्क के साथ जगह, साफ-सफाई और सुरक्षा निधि के लिए निर्धारित राशि जमा करनी होगी। इसके बाद ही चिन्हित स्थान पर पंडाल लगाने की अनुमति दी जाएगी। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश के बाद निगम आयुक्त मोनिका वर्मा ने व्यवस्था को लेकर सख्ती शुरू कर दी है।
निगम के राजस्व विभाग के अधिकारी रवि श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि गणेश और दुर्गा पंडाल का क्षेत्रफल 5 हजार वर्गफीट से कम हो या अधिक, हर स्थिति में निगम की अनुमति जरूरी है। बिना अनुमति पंडाल लगाने पर निगम एकतरफा कार्रवाई कर सकता है। आयोजन के बाद नियमों के अनुसार सुरक्षा निधि वापस किए जाने का प्रावधान भी है।
मार्ग परिवर्तन के लिए NOC जरूरी
पंडाल की वजह से यदि यातायात मार्ग में परिवर्तन करना पड़ता है तो आयोजन समिति को संबंधित अनुविभागीय अधिकारी और थाना प्रभारी से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लेना होगा। इसके साथ आवश्यक प्रतिवेदन भी प्रस्तुत करना होगा। इन औपचारिकताओं के बिना निगम द्वारा पंडाल लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं यदि आयोजन के लिए जमीन भिलाई इस्पात संयंत्र की है तो संयंत्र प्रबंधन से अनुमति लेना भी अनिवार्य होगा।
नुकसान हुआ तो सुरक्षा निधि से होगी भरपाई
आयोजन के दौरान सड़क की खुदाई, नाली या निकाय की किसी अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तो उसकी भरपाई जमा सुरक्षा निधि से की जाएगी। आयोजन समिति को जिम्मेदार पदाधिकारियों की सूची भी निगम को देनी होगी। आयोजन स्थल पर मेला या मीना बाजार के लिए भी पर्याप्त जगह जरूरी होगी और तंग स्थानों पर इसका संचालन नहीं किया जा सकेगा।
गुफा, झांकी और अन्य अस्थायी संरचनाओं के लिए अलग अनुमति लेना होगा। ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल निर्धारित सीमा और मध्यम आवाज में करना होगा। प्रशासन ने पिछले वर्ष की तरह इस बार भी डीजे पर प्रतिबंध बरकरार रखा है। इसके अलावा जबरन चंदा वसूली पर भी प्रशासन की निगरानी रहेगी।
















