दुर्ग में नेशनल लोक अदालत का बड़ा असर, 4.10 लाख से अधिक मामलों का हुआ समाधान

0
15

दुर्ग  वर्षों से चल रहे पारिवारिक विवाद, आपराधिक मामले, बैंक और बिजली से जुड़े बकाया समेत हजारों मामलों का शनिवार को समाधान हुआ। वर्ष 2026 की तीसरी नेशनल लोक अदालत में दुर्ग जिले में कुल 4,10,720 न्यायालयीन और प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया। इन मामलों में करीब 685.90 करोड़ रुपये की समझौता राशि पर सहमति बनी

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देश और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के मार्गदर्शन में आयोजित इस लोक अदालत का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के निर्देशन में किया गया।

37 खंडपीठों में हुई सुनवाई
लोक अदालत के लिए जिले में 37 खंडपीठों का गठन किया गया। परिवार न्यायालय दुर्ग, जिला न्यायालय दुर्ग, व्यवहार न्यायालय भिलाई-3, पाटन और धमधा सहित किशोर न्याय बोर्ड, श्रम न्यायालय, स्थायी लोक अदालत, राजस्व न्यायालय और उपभोक्ता फोरम में मामलों की सुनवाई हुई।

कुल निराकृत मामलों में 13,851 न्यायालयीन प्रकरण और 3,96,869 प्री-लिटिगेशन मामले शामिल रहे। बैंकिंग और वित्तीय संस्थाओं, विद्युत तथा दूरसंचार से जुड़े बड़ी संख्या में विवादों का भी आपसी सहमति से समाधान किया गया।

समझौते से फिर जुड़ा परिवार
लोक अदालत में कुछ मामले ऐसे भी रहे, जिनका महत्व केवल आंकड़ों में नहीं आंका जा सकता। परिवार न्यायालय दुर्ग में लंबे समय से मतभेद का सामना कर रहे एक दंपती ने लोक अदालत के दौरान अपने विवाद को खत्म करने का फैसला लिया।

न्यायालय की समझाइश के बाद दोनों ने पुराने मतभेद पीछे छोड़कर आपसी सम्मान और विश्वास के साथ आगे बढ़ने पर सहमति जताई। दोनों ने अदालत में एक-दूसरे को माला पहनाई और खुशी-खुशी घर लौटे।

पुरानी पारिवारिक रंजिश का भी हुआ अंत
एक अन्य मामले में परिवार के सदस्यों के बीच वर्षों से चली आ रही रंजिश आपराधिक मुकदमे तक पहुंच गई थी। लोक अदालत में संवाद और समझाइश के जरिए दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और विवाद का शांतिपूर्ण समाधान हुआ।

इस मामले में पांच पक्षकार जुड़े थे। सभी की व्यक्तिगत उपस्थिति संभव नहीं थी, इसलिए कुछ पक्षकारों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समझौते की प्रक्रिया में हिस्सा लिया। तकनीक की मदद से दूरी कम हुई और मध्यस्थता के जरिए विवाद का समाधान संभव हुआ।

चोरी की मोटरसाइकिल के मामले में समझौता
एक अन्य मामले में एक व्यक्ति की मोटरसाइकिल चोरी हो गई थी। बाद में मोटरसाइकिल बरामद कर उसे सुपुर्द कर दिया गया। मामला लोक अदालत में पहुंचने पर प्रार्थी ने आपसी राजीनामे की इच्छा जताई।

न्यायालय की समझाइश के बाद आरोपियों ने भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराने का भरोसा दिलाते हुए माफी मांगी। प्रार्थी की सहमति के बाद मामला आपसी राजीनामे के आधार पर सौहार्दपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया।

न्याय के साथ स्वास्थ्य की भी चिंता
लोक अदालत के दौरान जिला चिकित्सालय दुर्ग के सहयोग से एक दिवसीय निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया। चिकित्सा अधिकारी डॉ. निवेदिता गार्डिया और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।

न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, पक्षकारों और आम नागरिकों ने शिविर का लाभ उठाया। इस पहल के जरिए न्यायिक प्रक्रिया के साथ लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों का भी ध्यान रखा गया।

जेल में बने उत्पादों की प्रदर्शनी
केंद्रीय जेल दुर्ग में निरुद्ध बंदियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री भी लोक अदालत परिसर में आयोजित की गई। लोगों ने इन उत्पादों में रुचि दिखाई।

इस पहल ने यह संदेश भी दिया कि न्याय व्यवस्था केवल दंड देने तक सीमित नहीं है, बल्कि सुधार, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में वापसी भी न्याय प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

नेशनल लोक अदालत ने एक बार फिर यह दिखाया कि विवादों का समाधान केवल कानूनी लड़ाई के जरिए ही नहीं, बल्कि संवाद, समझौते और आपसी सहमति से भी किया जा सकता है। यही लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here