
रायपुर छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र का ईरपानार गांव अब अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ चुका है। वर्षों तक बिना बिजली के जीवन बिताने वाले इस दूरस्थ गांव में पहली बार विद्युत आपूर्ति पहुंची, जिससे विकास की नई शुरुआत हुई है।
क्यों खास है यह उपलब्धि
- ईरपानार, नारायणपुर से लगभग 30 किमी दूर
- रास्ता बेहद कठिन:
- घने जंगल
- पहाड़ी इलाके
- कई जगह पैदल सफर
- बरसात में संपर्क लगभग टूट जाता है
👉 ऐसे इलाके में बिजली पहुंचाना एक बड़ी तकनीकी और मानवीय चुनौती थी
कैसे पूरा हुआ काम
- Chhattisgarh State Power Distribution Company Limited की टीम ने मिशन मोड में काम किया
- कई जगह:
- मशीनों के बजाय मानव श्रम से पोल और तार पहुंचाए गए
- कलेक्टर Namrata Jain के नेतृत्व में कार्य पूरा हुआ
लागत और प्रभाव
- कुल लागत: ₹56.11 लाख
- लेकिन असर:
- आने वाली पीढ़ियों तक
गांव में क्या बदलेगा
- ✔️ बच्चों को रात में पढ़ाई के लिए रोशनी
- ✔️ मोबाइल चार्जिंग और बेसिक सुविधाएं
- ✔️ पंखा, लाइट जैसे उपकरणों से आसान जीवन
- ✔️ भविष्य में:
- डिजिटल शिक्षा
- स्वास्थ्य सेवाएं
- छोटे व्यवसाय
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
- पहली बार घरों में बल्ब जलने पर जश्न जैसा माहौल
- लोगों ने इसे “ऐतिहासिक दिन” बताया
- लालटेन और लकड़ी पर निर्भर जीवन अब बदलने लगा है
बड़ी तस्वीर
ईरपानार सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि:
- विकास अब अंतिम छोर तक पहुंच रहा है
- अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में भी
- बिजली
- सड़क
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
तेजी से पहुंचाने का प्रयास जारी है



















