
पन्ना जिले में पराली (नरवाई) जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां अमानगंज तहसील के ग्राम पिपरवाह के किसानों ने खुद ही पहल करते हुए पराली जलाने की घटना पर पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई।
किसानों की जागरूक पहल
ग्राम पिपरवाह में किसानों ने प्रशासन और राजस्व विभाग के सहयोग से स्वयं संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की। यह कदम पर्यावरण संरक्षण और कानून के पालन की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।
अन्य क्षेत्रों में भी कार्रवाई
- गुनौर विकासखंड में पराली जलाने के 17 मामलों में दंडात्मक कार्रवाई के लिए प्रकरण अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) को भेजे गए हैं।
- हिनौती (अमानगंज) में घटना की जांच कर संयुक्त पंचनामा तैयार किया गया।
- पन्ना ब्लॉक के सुनहरा और जरूआपुर गांवों में भी दो किसानों के खिलाफ कार्रवाई कर रिपोर्ट SDM को सौंपी गई है।
पहले से लागू है प्रतिबंध
जिला कलेक्टर द्वारा 2 अप्रैल को आदेश जारी कर जिले में पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद घटनाएं सामने आने पर प्रशासन सख्ती बरत रहा है।
कृषि विभाग की सलाह
कृषि विभाग किसानों को पराली जलाने के बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करने की सलाह दे रहा है, जैसे—
- स्ट्रॉ रीपर
- हैप्पी सीडर
- सुपर सीडर
इन मशीनों की मदद से पराली को खेत में ही मिलाकर प्राकृतिक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है और प्रदूषण भी नहीं होता।
क्या है संदेश
यह घटना बताती है कि अब किसान भी पर्यावरण और कानून को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं। प्रशासन का उद्देश्य दंड देना ही नहीं, बल्कि किसानों को जागरूक कर टिकाऊ खेती की ओर बढ़ाना है।
















