
रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि बदलते वैश्विक परिवेश में भारत की शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख बनाना समय की आवश्यकता है। उनका कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रभावी और जिम्मेदार उपयोग विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के साथ भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
नई दिल्ली स्थित संसद भवन में आयोजित शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में सांसद अग्रवाल ने बतौर सदस्य हिस्सा लिया। बैठक में नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार और शिक्षा में AI के बढ़ते प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है। ऐसे में NTA को अधिक सक्षम, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए ठोस सुधार जरूरी हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा में नई तकनीकों का उपयोग केवल डिजिटल बदलाव तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य नवाचार, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों का विस्तार होना चाहिए।
बैठक में समिति अध्यक्ष मुकुल वासनिक, सांसद रवि शंकर प्रसाद, पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन, उच्चतर शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी और NTA महानिदेशक डॉ. अभिषेक सिंह सहित कई विशेषज्ञों ने अपने सुझाव साझा किए।
सांसद अग्रवाल ने विश्वास जताया कि समिति में हुए विचार-विमर्श से मिले सुझाव देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।



















