बजट 2026 भारत की अगली विकास यात्रा का रोडमैप: डॉ. अरुणाभा घोष

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नई दिल्ली । केंद्रीय बजट 2026 को लेकर काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) के सीईओ डॉ. अरुणाभा घोष ने इसे भारत की भविष्य की क्षमताओं को आकार देने वाला एक “मार्गदर्शक प्रकाशस्तंभ (Beacon)” बताया है। उनका कहना है कि यह बजट केवल नीतिगत दिशा ही नहीं दिखाता, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि आने वाले वर्षों में भारत के संस्थानों, बाजारों और नवोन्मेषकों को किस तरह विकसित होना होगा।

डॉ. घोष के अनुसार, बजट 2026 में ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शहरी विकास और कृषि जैसे अहम क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है, जो भारत की अगली पीढ़ी की विकास क्षमता को मजबूत करेगा।

रेयर अर्थ कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 पर जोर

बजट में घोषित रेयर अर्थ कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को डॉ. घोष ने नीतिगत इरादों से आगे बढ़कर राज्य-स्तरीय क्रियान्वयन की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला की पुरानी कमी — प्रसंस्करण (Processing) — को दूर करने में मदद करेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस बदलाव को ऑफटेक गारंटी, निरंतर अनुसंधान एवं विकास (R&D) और रणनीतिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से और सशक्त बनाए जाने की जरूरत है।

शहरों के लिए ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन्स’ की जरूरत

सीईईडब्ल्यू के शोध का हवाला देते हुए डॉ. घोष ने कहा कि भारत के शहर पहले से ही अत्यधिक गर्मी, शहरी बाढ़ और जल संकट जैसी जलवायु चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में टियर-2 और टियर-3 शहरों को आर्थिक विकास के नए केंद्र के रूप में उभारने के लिए ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन्स’ का गठन एक समयानुकूल कदम है।

उन्होंने कहा कि म्युनिसिपल बॉन्ड को प्रोत्साहन देने से शहरी बुनियादी ढांचे के लिए निजी पूंजी जुटाने के नए रास्ते खुल सकते हैं।

नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में CCUS अहम

पावर, स्टील, सीमेंट, रिफाइनरी और रसायन जैसे क्षेत्रों में कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (CCUS) को प्राथमिकता दिए जाने को डॉ. घोष ने बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि यही क्षेत्र भारत के नेट-जीरो रोडमैप को परिभाषित करेंगे।

किसानों के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर

डॉ. घोष ने बजट में प्रस्तावित ‘भारत विस्तार’ और बहुभाषी एआई-सक्षम एग्री स्टैक को किसानों के लिए बड़े पैमाने पर लाभकारी बताया। उनके अनुसार, इससे डेटा का उपयोग उच्च आय, कम जोखिम और बेहतर जलवायु लचीलापन हासिल करने में किया जा सकेगा।

आपदा जोखिम वित्तपोषण को लेकर उत्साह

डॉ. घोष ने बजट के साथ-साथ आपदा जोखिम वित्तपोषण को मजबूत किए जाने पर भी संतोष जताया। उन्होंने बताया कि 16वें वित्त आयोग ने 2026–31 के लिए 2.04 लाख करोड़ रुपये के आपदा जोखिम प्रबंधन कोष की सिफारिश की है, जो पिछले चक्र की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक है। यह कोष एक वैज्ञानिक और जलवायु-सूचित ‘डिजास्टर रिस्क इंडेक्स’ पर आधारित है, जिसमें लू, बिजली गिरने और बाढ़ जैसी 10 प्रमुख आपदाएं शामिल हैं।

समावेशी और कम-कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर भारत

अंत में डॉ. अरुणाभा घोष ने कहा कि बजट 2026 के ये सभी कदम मिलकर भारत को प्रतिस्पर्धी, जलवायु-अनुकूल, कम कार्बन उत्सर्जन वाली और समावेशी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ाते हैं।

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