
भोपाल अक्षय तृतीया (20 अप्रैल) के अवसर पर संभावित बाल विवाहों को रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
निगरानी तंत्र को किया जा रहा मजबूत
भोपाल स्थित संचालनालय में आयोजित एक दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य
- जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाना
- सूचना मिलते ही त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना रहा।
विशेषज्ञों ने दिए जरूरी निर्देश
कार्यक्रम में विधि और बाल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने अधिकारियों को
- कानून के प्रावधानों
- अधिकारों और जिम्मेदारियों
- त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया
के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
बाल विवाह रोकने की प्रक्रिया समझाई
प्रशिक्षण में बताया गया कि
- सूचना मिलते ही निषेधाज्ञा कैसे जारी करवाई जाए
- यदि विवाह हो चुका हो तो उसे शून्य घोषित करने की प्रक्रिया क्या है
- पुलिस और जिला प्रशासन के साथ समन्वय कैसे किया जाए
फील्ड की चुनौतियों पर चर्चा
अधिकारियों ने जमीनी स्तर की समस्याएं साझा कीं, जिनका समाधान विशेषज्ञों ने सुझावों के माध्यम से दिया।
सरकार का सख्त रुख
विभाग ने स्पष्ट किया है कि अक्षय तृतीया के दौरान
- निगरानी तंत्र पूरी तरह सक्रिय रहेगा
- किसी भी बाल विवाह की सूचना पर तुरंत कार्रवाई होगी
लक्ष्य: बाल विवाह मुक्त प्रदेश
कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों ने प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया। सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी बच्चे का भविष्य इस कुप्रथा के कारण प्रभावित न हो।

















