
रायपुर छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की पहल अब जमीन पर असर दिखाने लगी है। मनरेगा के तहत बनाए गए चेक डैम न केवल पानी की समस्या का समाधान कर रहे हैं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना रहे हैं।
बलरामपुर जिले के राजपुर जनपद के अंतर्गत ग्राम बदौली इसका एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है। कभी पानी की कमी और बारिश पर निर्भर रहने वाला यह गांव आज जल समृद्धि की ओर बढ़ चुका है।
पहले की स्थिति
- खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर
- गर्मियों में जल संकट
- रोजगार के लिए पलायन की मजबूरी
अब क्या बदला
चेक डैम बनने के बाद गांव में पानी का संग्रहण शुरू हुआ, जिससे भूजल स्तर बढ़ा और कुओं-हैंडपंपों में सालभर पानी उपलब्ध रहने लगा। इसका सीधा फायदा किसानों को मिला।
- 20–25 किसानों को सालभर सिंचाई सुविधा
- अब 2 से 3 फसलें लेने लगे किसान
- सब्जी और नगदी फसलों की खेती में बढ़ोतरी
गांव के किसान बताते हैं कि अब खेती आसान हो गई है और उत्पादन भी बढ़ा है। इससे उनकी आय में सुधार हुआ है और जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है।
रोजगार और आत्मनिर्भरता
- मनरेगा के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला
- पलायन में कमी आई
- गांव में आर्थिक गतिविधियां बढ़ीं
जल संरक्षण की यह पहल केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की नई दिशा बनती नजर आ रही है। बदौली जैसे गांव इस बात का प्रमाण हैं कि सही योजना और जनभागीदारी से गांव आत्मनिर्भर बन सकते हैं।



















