
चेन्नई तमिलनाडु सरकार ने राज्य में शराब बिक्री से जुड़े कथित अवैध वसूली तंत्र पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे बंद करने का दावा किया है। सरकार के अनुसार, शराब की थोक और खुदरा बिक्री के दौरान वर्षों से चल रही अनधिकृत वसूली व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है, जिससे अब बिक्री से प्राप्त राशि सीधे सरकारी खजाने में जमा होगी।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शराब बिक्री से जुड़े सभी वित्तीय लेनदेन पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित किए जाएं। सरकार ने इस व्यवस्था की निगरानी के लिए आईएएस अधिकारी पूजा कुलकर्णी को नया आबकारी आयुक्त नियुक्त किया है।
सरकारी जांच में सामने आया है कि शराब की प्रत्येक पेटी, बीयर और वाइन के कार्टन पर अतिरिक्त राशि वसूली जा रही थी। सरकार का दावा है कि इस अवैध व्यवस्था के कारण हर वर्ष बड़ी रकम निजी हाथों में जा रही थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार ने यह भी बताया कि शराब बिक्री प्रणाली में सुधार के तहत नियमों के विरुद्ध संचालित 717 शराब दुकानों को बंद किया गया है। इनमें धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और परिवहन केंद्रों के आसपास स्थित दुकानें शामिल हैं। सबसे अधिक दुकानें मदुरै, कोयंबटूर, तिरुचि, चेन्नई और सलेम क्षेत्रों में बंद की गई हैं।
सरकार के अनुसार, इन दुकानों के बंद होने से राजस्व पर प्रभाव पड़ेगा, लेकिन शराब की कीमतें बढ़ाने या नई दुकानें खोलने की कोई योजना नहीं है।
युवाओं में नशे की रोकथाम के लिए सरकार ने शराब खरीदने की न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष के नियम को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। अब शराब बिक्री केंद्रों पर पहचान पत्र और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य में शराब बिक्री व्यवस्था का निजीकरण करने का कोई प्रस्ताव नहीं है और सरकारी नियंत्रण वाली प्रणाली के माध्यम से ही संचालन जारी रहेगा।



















