
रायपुर में बैंकों के 50 से अधिक अधिकारियों के साथ हुई बैठक, साइबर अपराध रोकने और पीड़ितों की राशि वापस दिलाने पर जोर
रायपुर साइबर ठगी और बैंकिंग धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए रायपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा सभी प्रमुख बैंकों के नोडल अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में साइबर अपराधों की रोकथाम, बैंकिंग प्रक्रियाओं को और सुरक्षित बनाने तथा पीड़ितों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक का आयोजन पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला की अध्यक्षता में यातायात कार्यालय के सभाकक्ष में किया गया। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त एवं सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी भी मौजूद रहे। विभिन्न बैंकों के लगभग 50 नोडल अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया।
साइबर ठगी के मामलों में तुरंत 1930 पर शिकायत की अपील
बैठक में निर्देश दिए गए कि ऑनलाइन ठगी के शिकार लोगों को इधर-उधर भेजने के बजाय उन्हें तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करने या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जाए। साथ ही सभी बैंक शाखाओं में हेल्पलाइन नंबर का प्रमुखता से प्रदर्शन सुनिश्चित करने को कहा गया।
नए खातों के लिए कड़ी होगी सत्यापन प्रक्रिया
बैंकों को नए खाते खोलते समय आवेदकों का भौतिक सत्यापन करने, पंजीकृत मोबाइल नंबर की जांच करने और कॉर्पोरेट खातों के लिए अतिरिक्त सत्यापन प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए। कॉर्पोरेट खाते खुलने के 15 दिन बाद संबंधित पते का दोबारा सत्यापन करने पर भी जोर दिया गया।
संदिग्ध लेन-देन पर विशेष निगरानी
बैठक में संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की पहचान और उस पर कार्रवाई की प्रक्रिया की समीक्षा की गई। बैंक अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी तत्काल संबंधित एजेंसियों के साथ साझा की जाए।
बैंकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
पुलिस अधिकारियों ने बैंक परिसरों में सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया। बैंकों से कहा गया कि प्रवेश और पीछे के हिस्सों सहित महत्वपूर्ण स्थानों पर कैमरे लगाए जाएं तथा इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए।
बार-बार खाते खुलवाने वालों पर रहेगी नजर
बैठक में ऐसे लोगों की पहचान करने पर भी चर्चा हुई जो अलग-अलग स्थानों पर बार-बार बैंक खाते खुलवाते हैं। बैंकों को ऐसे मामलों की जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए ताकि संभावित वित्तीय अपराधों को रोका जा सके।
पीड़ितों की राशि जल्द लौटाने पर फोकस
पुलिस और बैंक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, सूचना का त्वरित आदान-प्रदान करने, साइबर अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित करने तथा ठगी के शिकार लोगों की राशि जल्द वापस कराने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा की गई।



















