
आधुनिक जीवनशैली पर जताई चिंता, सात्विक जीवन और सकारात्मक सोच को बताया जरूरी
रायपुर ब्रह्माकुमारी संस्था की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका गीता दीदी ने कहा है कि आधुनिक जीवनशैली, सोशल मीडिया और आभासी दुनिया लोगों के जीवन में तनाव बढ़ाने का बड़ा कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक शांति और संतुलित जीवन के लिए ध्यान, सकारात्मक सोच और सात्विक जीवनशैली अपनाना आवश्यक है।
सुविधाएं बढ़ीं, लेकिन शांति कम हुई
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित एक विशेष व्याख्यान में गीता दीदी ने कहा कि विज्ञान और तकनीक ने जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ ही मानसिक शांति और मानवीय संवेदनाएं कम होती जा रही हैं। लोग बिना स्पष्ट उद्देश्य के भागदौड़ भरी जिंदगी जी रहे हैं, जिससे तनाव लगातार बढ़ रहा है।
अतीत में उलझने से बढ़ता है तनाव
उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग वर्तमान में जीने के बजाय अतीत की घटनाओं में उलझे रहते हैं। जिन परिस्थितियों को बदला नहीं जा सकता, उन्हें स्वीकार करना चाहिए और जिनमें सुधार संभव हो, उनके लिए सकारात्मक प्रयास करना चाहिए।
युवाओं पर सोशल मीडिया का बढ़ता दबाव
गीता दीदी ने कहा कि सोशल मीडिया, वर्चुअल दुनिया और “लोग क्या कहेंगे” जैसी सोच युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। दिखावे और प्रतिस्पर्धा की संस्कृति ने सामाजिक दबाव को बढ़ाया है, जिससे तनाव और चिंता की समस्या बढ़ रही है।
तनावमुक्त जीवन के लिए दिए ये सुझाव
उन्होंने तनाव कम करने के लिए:
- नियमित मेडिटेशन
- सात्विक आहार
- डिजिटल डिटॉक्स
- परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय
- सकारात्मक सोच और आत्मचिंतन
को अपनाने की सलाह दी।
मेडिटेशन से बढ़ती है निर्णय क्षमता
गीता दीदी के अनुसार, ध्यान और परमात्मा से जुड़ाव व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करता है और उसकी निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत बनाता है।



















