छत्तीसगढ़ की 33 जेलों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, हजारों बंदियों ने किया योगाभ्यास

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रायपुर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की सभी 33 जेलों में उत्साहपूर्वक योग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों बंदियों ने योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन और मानसिक संतुलन का संदेश दिया।

केंद्रीय जेल रायपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में जेल डीजी हिमांशु गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पहल से आज पूरा विश्व योग के रंग में रंगा है और हम सभी इस महान भारतीय परंपरा का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग का वास्तविक अर्थ शरीर, मन, सांस और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करना है।

उन्होंने कहा कि योग एक प्राचीन भारतीय पद्धति है, जो शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाने में मदद करती है। योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि तनाव कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है।

केंद्रीय जेल रायपुर में आयोजित विशेष योग शिविर में पुरुष प्रकोष्ठ के 500 और महिला प्रकोष्ठ की 150 बंदियों ने भाग लिया। योग सत्र में आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षक अनिल अग्रवाल और उनकी टीम ने बंदियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान की तकनीकों का अभ्यास कराया।

शिविर के दौरान ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, अनुलोम-विलोम, कपालभाति और ध्यान जैसी क्रियाओं का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने इन योगासनों के शारीरिक और मानसिक लाभों की भी जानकारी दी।

इस आयोजन का उद्देश्य बंदियों को तनाव, अवसाद और नकारात्मक विचारों से बाहर निकालकर उनमें आत्मविश्वास, संयम, आत्म-नियंत्रण और सकारात्मक सोच विकसित करना था। कार्यक्रम में जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री सहित आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के अन्य प्रशिक्षक भी उपस्थित रहे।

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