
पिता
(आप सभी को पितृ दिवस की हार्दिक बधाई के साथ मेरी रचना सादर संप्रेषित….)
त्याग स्वयं ही सुख जीवन का
दुःख विष नित्य ही पान करे
संतानों के हित के खातिर जो
अपना सब कुछ कुर्बान करे
निज जीवन आनंदो को तज
संतति के लिए जीता है
पालनकर्ता विष्णु के सम
परम पूज्य वह पिता है
स्वयं की चिंता नहीं उसे कुछ
संतानों का क्षण-क्षण है
उपर से दिखता कठोर पर
अन्दर से कोमल उपवन है
पिता प्रेम का सागर है,गर
माता ममता की सरिता है
पालनकर्ता विष्णु के सम
परम पूज्य वह पिता है…
✍️ विरेन्द्र सिंह ठाकुर
उदघोषक,कवि,व्याख्याकार
महासचिव-मम् राजीवलोचन
जिला मानस संघ-गरियाबंद(छ. ग.)
ग्राम-कपसीडीह(राजिम)
जिला-गरियाबंद(छ.ग.)




















