भोरमदेव में महाचतुर शुद्धि सहस्र कलशम्: वैदिक अनुष्ठानों से गूंजा मंदिर परिसर

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कलशाभिषेक, अष्टदिक्पाल पूजन और शिव आराधना के बीच उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था


कवर्धा छत्तीसगढ़ के ‘खजुराहो’ के नाम से प्रसिद्ध भोरमदेव महादेव मंदिर में आयोजित ‘महाचतुर शुद्धि सहस्र कलशम्-2026’ वैदिक मंत्रोच्चार, शैव आगम परंपराओं और भक्तिमय माहौल के बीच जारी है। महा दिव्य देशम् फाउंडेशन (SMDDF) और भोरमदेव सनातन तीर्थ समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पांच दिवसीय महाअनुष्ठान में देशभर से श्रद्धालु शामिल होकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं।

चौथे दिन हुए दुर्लभ वैदिक अनुष्ठान

महाअनुष्ठान के चौथे दिन कलशाभिषेक, अष्टदिक्पालक आवाहन, शिवलिंग स्थापना, योगिनी त्वरिता पूजा और विशेष संगीत, नृत्य एवं वाद्य अर्चना का आयोजन किया गया। केरल से आए वैदिक आचार्यों ने शैव आगम परंपरा के अनुसार भगवान भोरमदेव का कलशाभिषेक कराया। अभिमंत्रित कलशों के जल से शिवलिंग का अभिषेक कर विश्व शांति, क्षेत्र की समृद्धि और जनकल्याण की कामना की गई।

अष्टदिक्पाल पूजन और शिवलिंग स्थापना का विशेष महत्व

अनुष्ठान के दौरान आठों दिशाओं के अधिष्ठाता देवताओं का वैदिक विधि से आवाहन कर क्षेत्र की रक्षा और लोकमंगल की प्रार्थना की गई। वहीं, वैदिक एवं शैव आगम परंपरा के अनुसार शिवलिंग की स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा भी संपन्न हुई, जिसे मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा के पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है।

संगीत और नृत्य से शिवमय हुआ वातावरण

शाम के समय भगवान भोरमदेव के समक्ष नादस्वरम, चेंडा और मृदंगम जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मंगलध्वनि और शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुतियों ने पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय बना दिया। सनातन परंपरा में संगीत और नृत्य को ईश्वर आराधना का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

मुख्यमंत्री ने भी लिया अनुष्ठान में हिस्सा

महाअनुष्ठान में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपनी धर्मपत्नी के साथ शामिल हुए और भगवान भोरमदेव का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर पंडरिया विधायक भावना बोहरा, शद्दाणी दरबार के संत तथा विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी पूजा-अर्चना में भाग लिया।

गुरु पूर्णिमा पर होगा भव्य समापन

आयोजन समिति के अनुसार 29 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) को सहस्र कलशाभिषेक, उषा पूजा, शिवलिंग निमज्जनम् और श्रीचक्र पूजा के साथ महाअनुष्ठान का समापन होगा। श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इस आध्यात्मिक आयोजन का पुण्य लाभ लेने की अपील की गई है।

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