अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के सरगना वीरेंद्र बसोया को UAE से भारत लाया गया

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NCB की बड़ी कार्रवाई, 6,000 करोड़ रुपये के पुणे ड्रग मामले में आरोपी


नई दिल्ली । भारत की मादक पदार्थ विरोधी मुहिम में बड़ी सफलता मिली है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के आरोपी वीरेंद्र सिंह बसोया उर्फ वीरेंद्र बैसोया का संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत प्रत्यर्पण कराया है। दुबई में गिरफ्तारी के बाद उसे विशेष प्रक्रिया के तहत एयर इंडिया की उड़ान से भारत लाया गया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को इसकी जानकारी देते हुए कार्रवाई को नशीले पदार्थों के खिलाफ केंद्र सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

विदेश में छिपे तस्करों पर कार्रवाई

गृह मंत्री ने कहा कि भारतीय जांच एजेंसियां विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का पता लगाकर उनके नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बसोया को भारत लाने के लिए एजेंसियों ने जांच में ‘टॉप-टू-बॉटम और बॉटम-टू-टॉप’ दृष्टिकोण अपनाया।

बसोया की भारत वापसी के बाद जांच एजेंसियों को गिरोह के वित्तीय ढांचे और देश में सक्रिय स्थानीय नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

पुणे के ड्रग मामले में प्रमुख आरोपी

बसोया को पुणे के चर्चित करीब 6,000 करोड़ रुपये के ड्रग मामले में प्रमुख आरोपियों में शामिल बताया गया है। NCB ने उसकी अंतरराष्ट्रीय तलाश के लिए उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी कराया था।

मामला फरवरी 2024 में सामने आया था, जब पुणे और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पुणे, दिल्ली और एनसीआर से 1,700 किलोग्राम से अधिक मेफेड्रोन बरामद की गई थी। इसकी अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में अनुमानित कीमत करीब 5,500 से 6,000 करोड़ रुपये बताई गई थी।

फैक्ट्री में हो रहा था ड्रग का उत्पादन

जांच के अनुसार, पुणे के कुरकुंभ औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक वैध रासायनिक निर्माण इकाई की आड़ में बड़े पैमाने पर मेफेड्रोन का उत्पादन किया जा रहा था। तैयार ड्रग को कूरियर और बड़े पार्सल के माध्यम से दिल्ली, मुंबई और पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न स्थानों तक भेजे जाने और वहां से विदेशों में पहुंचाए जाने का आरोप है।

जांच में गिरोह से जुड़े तस्करों के अलावा फैक्ट्री मालिकों, कूरियर ऑपरेटरों और अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई थी।

हवाला नेटवर्क की भी जांच

जांच एजेंसियों के मुताबिक बसोया दुबई से गिरोह के अंतरराष्ट्रीय वितरण, वित्तीय लेनदेन और कथित हवाला नेटवर्क को संचालित कर रहा था। वह मामले के मुख्य आरोपी संदीप धूनिया का करीबी सहयोगी बताया गया है।

बसोया के भारत आने के बाद एजेंसियां गिरोह के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, वित्तीय लेनदेन और भारत में मौजूद नेटवर्क की आगे जांच कर रही हैं। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।

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