
- रायपुर मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर कार्रवाई के साथ एनडीपीएस मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए रायपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा विकसित विशेष ट्रायल मॉनिटरिंग व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। न्यायालय, अभियोजन और पुलिस के समन्वित प्रयासों से वर्ष 2026 में अब तक 128 एनडीपीएस मामलों में दोषसिद्धि हुई है, जबकि 198 आरोपियों को न्यायालय ने दंडित किया है।
आंकड़ों के अनुसार, 71 मामलों में 92 आरोपियों को 10 वर्ष से कम की सजा, 23 मामलों में 37 आरोपियों को 10 वर्ष की सजा तथा 34 मामलों में 69 आरोपियों को 10 वर्ष से अधिक की सजा सुनाई गई है।
पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन में एनडीपीएस मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए कमिश्नरेट स्तर पर विशेष मॉनिटरिंग तंत्र तैयार किया गया। इसके तहत मध्य, पश्चिम और उत्तर जोन में ट्रायल मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी संबंधित डीसीपी और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्तों को सौंपी गई।
एनडीपीएस प्रकरणों की समग्र निगरानी और समन्वय के लिए एसीपी कोतवाली दीपक मिश्रा को नोडल अधिकारी बनाया गया। उनके नेतृत्व में न्यायालयीन स्टाफ, अभियोजन अधिकारियों और पुलिस के बीच लगातार समन्वय स्थापित किया गया, जिससे समन और वारंट की तामिली समय पर सुनिश्चित हो सकी।
पुलिस ने प्रत्येक मामले के साक्षियों की सूची तैयार कर यह सुनिश्चित किया कि निर्धारित तारीखों पर जरूरी गवाह न्यायालय में उपस्थित रहें। नियमित मॉनिटरिंग, साक्षियों से संपर्क और अभियोजन पक्ष के साथ बेहतर तालमेल के कारण कई लंबित मामलों का तेजी से निराकरण संभव हो सका।
समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि कई गंभीर मामलों में आरोपी जमानत मिलने के बाद अदालत में पेश नहीं हो रहे थे। ऐसे बेल जंपरों और स्थायी वारंटधारी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा और मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में दबिश देकर फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
रायपुर पुलिस का यह ट्रायल मॉनिटरिंग मॉडल न्यायालय, अभियोजन और पुलिस के बीच प्रभावी समन्वय का सफल उदाहरण बनकर उभरा है। इस पहल से न केवल लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण में मदद मिली, बल्कि नशे के कारोबार में शामिल अपराधियों को समयबद्ध सजा दिलाकर समाज में सख्त संदेश भी दिया गया।



















