विश्व पर्यावरण दिवस 2026: हरित पहल, जल संरक्षण और जनसहभागिता से पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल बना रहा छत्तीसगढ़

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रायपुर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और हरित विकास के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता नजर आ रहा है। प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं और जनभागीदारी आधारित अभियानों को बढ़ावा दे रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन को प्राथमिकता दी जा रही है। ‘हरियाली प्रसार योजना’, ‘किसान वृक्ष मित्र योजना’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियान पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दे रहे हैं। इन पहलों से हरित क्षेत्र बढ़ने के साथ किसानों को आर्थिक लाभ भी मिल रहा है।

शहरी क्षेत्रों में ‘ऑक्सीवन योजना’ के तहत ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ‘मोर गांव मोर पानी’ और ‘मोर गांव मोर तरिया’ जैसे कार्यक्रम जल संरक्षण को नई दिशा दे रहे हैं। तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के प्रयासों से जल सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है।

राज्य सरकार नदी तटों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। नदी किनारों पर वृक्षारोपण और वेटलैंड संरक्षण परियोजनाओं के जरिए प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक बनाने के लिए नेशनल ग्रीन कॉर्प्स और ईको-क्लब कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को वृक्षारोपण, स्वच्छता और प्रकृति संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण तभी सफल होगा जब सरकार और समाज मिलकर जिम्मेदारी निभाएं। पौधारोपण, जल बचत, प्लास्टिक का कम उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे छोटे प्रयास भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित कर सकते हैं।

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