वर्क फ्रॉम होम: सुविधा या नई चुनौती?

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वर्क फ्रॉम होम: सुविधा या नई चुनौती?


डॉ डॉली शुक्ला
विषय-विशेषज्ञ इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार”
 प्रेरक वक्ता एवम करियर काउंसलर


समय के साथ कार्य करने की शैली लगातार बदल रही है। कभी कार्यालय में उपस्थित होकर काम करना ही सफलता की पहचान माना जाता था, लेकिन आज इंटरनेट और डिजिटल तकनीक ने घर से काम करना भी संभव बना दिया है। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान लाखों लोगों ने घर से काम किया और यह व्यवस्था आज भी कई संस्थानों में जारी है। ऐसे में यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि क्या वर्क फ्रॉम होम वास्तव में एक बेहतर विकल्प है या इसके साथ कुछ गंभीर चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं?
वर्क फ्रॉम होम का सबसे बड़ा लाभ यह है कि कर्मचारी यात्रा में लगने वाला समय और खर्च बचा सकते हैं। इससे उन्हें अपने परिवार, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास के लिए अधिक समय मिलता है। कंपनियों को भी कार्यालय के रखरखाव पर कम खर्च करना पड़ता है। कई शोधों में यह पाया गया है कि शांत वातावरण में काम करने वाले कर्मचारियों की उत्पादकता में भी वृद्धि होती है।
उदाहरण के लिए, बेंगलुरु में कार्यरत एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पहले प्रतिदिन लगभग तीन घंटे ट्रैफिक में बिताता था। घर से काम शुरू होने के बाद उसने उस समय का उपयोग नई तकनीक सीखने और परिवार के साथ समय बिताने में किया। परिणामस्वरूप उसके कार्य प्रदर्शन में सुधार हुआ और मानसिक तनाव भी कम हुआ।


लेकिन हर कहानी इतनी सकारात्मक नहीं होती। कई कर्मचारियों के लिए घर और कार्यालय के बीच की सीमाएँ समाप्त हो जाती हैं। देर रात तक ऑनलाइन बैठकों, लगातार ई-मेल और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण तनाव बढ़ सकता है। साथ ही, सहकर्मियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद न होने से टीमवर्क और नए विचारों का आदान-प्रदान भी प्रभावित होता है।
एक अन्य उदाहरण में, एक निजी विद्यालय की शिक्षिका को ऑनलाइन कक्षाएँ लेने के साथ-साथ अपने छोटे बच्चों की देखभाल भी करनी पड़ती थी। इससे उनके लिए कार्य और परिवार के बीच संतुलन बनाए रखना कठिन हो गया। यह दर्शाता है कि वर्क फ्रॉम होम सभी लोगों के लिए समान रूप से लाभदायक नहीं है।
इसके अलावा, हर क्षेत्र में यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकती। डॉक्टर, नर्स, पुलिसकर्मी, कारखानों के कर्मचारी, होटल उद्योग और परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों को अपने कार्यस्थल पर उपस्थित रहना ही पड़ता है। इसलिए वर्क फ्रॉम होम केवल कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए ही उपयुक्त है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य हाइब्रिड वर्क मॉडल का है, जिसमें कर्मचारी सप्ताह के कुछ दिन घर से और कुछ दिन कार्यालय से कार्य करते हैं। इससे कार्य की गुणवत्ता, टीमवर्क और व्यक्तिगत जीवन के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है।
निष्कर्षतः, वर्क फ्रॉम होम न तो पूरी तरह वरदान है और न ही अभिशाप। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि कर्मचारी और संस्थान इसे कितनी जिम्मेदारी, अनुशासन और संतुलित दृष्टिकोण के साथ अपनाते हैं। सही योजना और उचित प्रबंधन के साथ यह कार्य संस्कृति भविष्य के लिए एक प्रभावी और टिकाऊ विकल्प बन सकती है।?

 

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