संस्कार शिविर में बच्चे सीख रहे जीवन जीने की कला, मोबाइल से दूरी और संस्कारों पर जोर

0
103

रायपुर मालवीय रोड स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर (लघु तीर्थ) में 1 से 10 जून तक आयोजित ग्रीष्मकालीन श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर में बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ जीवन मूल्यों और व्यवहारिक ज्ञान का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दिगंबर जैन मंदिर पंचायत ट्रस्ट एवं आदिनाथ विद्या धार्मिक पाठशाला के तत्वावधान में आयोजित इस 10 दिवसीय शिविर में बड़ी संख्या में बच्चे भाग ले रहे हैं।

शिविर के दौरान सांगानेर (जयपुर) से आए विद्वान बच्चों को सरल और रोचक तरीके से ‘बाल बोध भाग-1’ और ‘बाल बोध भाग-2’ का अध्ययन करा रहे हैं। कठिन धार्मिक सिद्धांतों को आसान भाषा में समझाने से बच्चों में धर्म और संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ रही है।

शिविर की विशेषता यह है कि यहां बच्चों को केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाई जा रही है। पंडित शरद जैन शास्त्री द्वारा बच्चों को माता-पिता, गुरुजनों और अतिथियों का सम्मान करने, अनुशासित जीवन अपनाने तथा परिवार के प्रति जिम्मेदार बनने के संस्कार दिए जा रहे हैं।

आधुनिक दौर में बढ़ती मोबाइल की लत से बच्चों को दूर रखने के लिए भी विशेष मार्गदर्शन दिया जा रहा है। उन्हें मोबाइल के दुष्प्रभावों की जानकारी देकर रचनात्मक गतिविधियों और सकारात्मक आदतों की ओर प्रेरित किया जा रहा है। इसके अलावा आदर्श दिनचर्या, सदाचार, शुद्ध शाकाहार और नैतिक मूल्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें भी सिखाई जा रही हैं।

जैन समाज के वरिष्ठ सदस्यों और प्रबुद्धजनों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्कार शिविर बच्चों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शिविर में प्रतिदिन बच्चों के लिए सात्विक स्वल्पाहार की व्यवस्था भी की जा रही है।

आयोजकों के अनुसार शिविर का उद्देश्य बच्चों में संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक जीवन दृष्टि का विकास करना है, ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बन सकें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here