विधानसभा में भावना बोहरा ने उठाए महिला सुरक्षा, पोषण और किसानों से जुड़े अहम मुद्दे

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सखी सेंटर, बाल संरक्षण, पोषण आहार और खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था पर सरकार से मांगी जानकारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने महिला सुरक्षा, बाल संरक्षण, पोषण आहार और कबीरधाम जिले की खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे सदन में उठाए। उन्होंने सखी वन स्टॉप सेंटरों की कार्यप्रणाली, आंगनबाड़ी पोषण आहार की गुणवत्ता, बाल संरक्षण योजनाओं और किसानों से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सरकार से विस्तृत जवाब मांगा।

प्रदेश में संचालित हैं 42 सखी वन स्टॉप सेंटर

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य में वर्तमान में 42 सखी वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं। पिछले तीन वर्षों में इन केंद्रों में घरेलू हिंसा के 12,359, दहेज प्रताड़ना के 87, यौन उत्पीड़न के 415 और अन्य महिला हिंसा से जुड़े 8,670 मामले दर्ज हुए। इनमें अधिकांश मामलों का निराकरण किया जा चुका है। इस दौरान हजारों महिलाओं को कानूनी सहायता, मनोसामाजिक परामर्श, चिकित्सा सुविधा और अस्थायी आश्रय भी उपलब्ध कराया गया।

पोषण आहार पर 440 करोड़ रुपये से अधिक खर्च

सरकार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वितरित होने वाले रेडी-टू-ईट, मीठा शक्ति आहार और नमकीन पौष्टिक दलिया के निर्माण, खरीद और वितरण के लिए 441.56 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। इसमें से 440.73 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

मिशन वात्सल्य के तहत 109 बाल संरक्षण संस्थाएं

बाल संरक्षण से जुड़े सवालों के जवाब में सरकार ने बताया कि राज्य में मिशन वात्सल्य के तहत 109 बाल देखरेख संस्थाएं संचालित हैं। इनमें बाल गृह, ओपन शेल्टर, विशेषीकृत दत्तक ग्रहण अभिकरण, संप्रेक्षण गृह और विशेष गृह शामिल हैं। साथ ही प्रदेश के सभी 33 जिलों में जिला बाल संरक्षण समितियां सक्रिय हैं। सरकार ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में बाल तस्करी, बाल श्रम, बाल विवाह और बाल यौन शोषण की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाकर प्रभावित बच्चों का रेस्क्यू और पुनर्वास कराया गया।

कबीरधाम में 75 हजार टन से अधिक भंडारण क्षमता

खाद्य मंत्री ने जानकारी दी कि कबीरधाम जिले में राज्य भंडार गृह निगम के 37 गोदाम संचालित हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 75,487 टन है। सरकार के अनुसार यह क्षमता सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त है। हालांकि जिले में 86 उचित मूल्य दुकान सह गोदाम भवन मरम्मत योग्य स्थिति में हैं, जिन्हें बजट उपलब्ध होने पर चरणबद्ध तरीके से दुरुस्त कराया जाएगा।

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