
रायपुर। राष्ट्रीय दृष्टिहीनता एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2025-26 में मोतियाबिंद उपचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। राज्य में अब तक 1 लाख 63 हजार 641 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन किए जा चुके हैं, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 91 प्रतिशत है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, Vision 2020 की अवधारणा के अनुरूप शासकीय अस्पतालों, गैर-शासकीय संगठनों (NGO) और निजी अस्पतालों के समन्वित प्रयासों से यह सफलता मिली है। इस व्यवस्था के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों तक नेत्र चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
कुल ऑपरेशनों में 51 प्रतिशत योगदान शासकीय एवं NGO अस्पतालों का रहा, जबकि 49 प्रतिशत ऑपरेशन निजी अस्पतालों में किए गए। विभाग का मानना है कि यह साझेदारी मॉडल उपचार की पहुंच और गुणवत्ता दोनों को बेहतर बना रहा है।
कोविड-19 महामारी के दौरान लंबित हुए मोतियाबिंद मामलों को कम करने के लिए विशेष अभियान भी चलाया गया। राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना के तहत घर-घर सर्वे कर मरीजों की पहचान की जा रही है और उनका समयबद्ध उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।
राज्य के 15 जिले कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस (CBBFS) प्राप्त कर चुके हैं, जबकि अन्य जिलों में भी अभियान तेजी से जारी है। रायपुर के माना स्थित 150 बिस्तरीय नेत्र चिकित्सालय को राज्य स्तरीय रेफरल सेंटर के रूप में विकसित किया गया है, जहां दूर-दराज के मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि समय पर जांच, पहचान और निःशुल्क उपचार की व्यवस्था से हजारों लोगों की आंखों की रोशनी बची है और उनके जीवन में नई उम्मीद लौटी है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।



















